गंभीर वैश्विक समस्या

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Edited By Amrit Vichar
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आतंकवाद दुनिया के सामने सबसे बड़ा और विकराल खतरा बना हुआ है। भारत दुनिया में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। भारत को कश्मीर, उत्तर-पूर्व और मध्य, पूर्व-मध्य और दक्षिण-मध्य भारत में वामपंथी चरमपंथी समूहों के आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद और …

आतंकवाद दुनिया के सामने सबसे बड़ा और विकराल खतरा बना हुआ है। भारत दुनिया में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। भारत को कश्मीर, उत्तर-पूर्व और मध्य, पूर्व-मध्य और दक्षिण-मध्य भारत में वामपंथी चरमपंथी समूहों के आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद और चरमपंथ में बढ़ोतरी दिखाई दी है।

यूक्रेन युद्ध और ताइवान को लेकर जारी तनाव के चलते अमेरिका और चीन के बीच महाशक्ति बनने की प्रतिस्पर्धा के बारे में कुछ भी अनुमान लगा पाना पहले से ज्यादा पेचीदा हो गया है। इस पूरी कवायद में क्षमताओं और सियासी प्रतिबद्धताओं की परीक्षा होने वाली है। इस कड़ी में चीन साफ तौर से आतंक-निरोधी अभियान को भूराजनीतिक औज़ार के तौर पर देखता है। हालांकि चीन ने इस साल संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की के खिलाफ भारत और अमेरिका के साझा प्रस्ताव में अड़ंगा लगा दिया।

मक्की लश्कर-ए-तैयबा के आका और 26/11 आतंकी हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद का रिश्तेदार है। चीन और अमेरिका के बीच सामरिक हितों पर होने वाले टकरावों का आतंक-निरोधी भूराजनीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही पश्चिम में आतंक के खिलाफ जंग की नीति को परदे के पीछे धकेलने की कवायद से भारत जैसे देश के लिए कई पेचीदा सवाल उभरते हैं।

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी की पूरी प्रक्रिया (दोहा में अमेरिका-तालिबान करार से लेकर हकीकत में वापसी तक) कमियों से भरी हुई थी। इस बीच आतंकवाद की रोकथाम से जुड़ी नई नीतियों और संरचनाओं ने आतंक-निरोधी क़वायद के भविष्य को लेकर एक विवादित मिसाल पेश कर दी है। ज़वाहिरी के मारे जाने को लेकर भी विश्लेषक इसी तरह के आकलन कर रहे हैं कि क्या ज़वाहिरी को तालिबान के भीतर से ही किसी ने धोखा दिया या अमेरिका से रियायत हासिल करने के लिए पाकिस्तानी फौज ने उसका भंडा फोड़ दिया।

निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ चलाई गई अब तक की मुहिमों ने बड़ी खामियों के बावजूद कई उपयोगी परिणाम दिए हैं। आज जब लोग पूरी दुनिया में आतंकवाद के फैलने तथा उनके हमलों से डर कर जी रही है। हिंसक उग्रवाद के खिलाफ बुनियादी कवायदों को और मजबूत करना बहुत जरूरी है।

अल्पकालिक फायदों के लिए इन प्रयासों को सियासी रंग देकर बेअसर बनाना कतई मुनासिब नहीं होगा। गंभीर वैश्विक समस्या को हल करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता है और भारत को अपनी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के प्रबंधन से संबंधित कई मुद्दों पर नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।