हल्द्वानी: एनजीटी ने नंधौर ईको सेंसटिव जोन में खनन की जांच को बनाई हाई पावर कमेटी
हल्द्वानी, अमृत विचार। राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरणविद् रिद्धिमा पांडे की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य के ईको सेंसटिव जोन में खनन की अनुमति देने के मामले में हाईपावर कमेटी बनाई है। यह कमेटी तीन माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी। शासन ने बीती सात जनवरी को आपदा …
हल्द्वानी, अमृत विचार। राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरणविद् रिद्धिमा पांडे की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य के ईको सेंसटिव जोन में खनन की अनुमति देने के मामले में हाईपावर कमेटी बनाई है। यह कमेटी तीन माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी।
शासन ने बीती सात जनवरी को आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के उपबंध, रिवर ड्रेजिंग नीति-2021 का हवाला देते हुए नंधौर अभ्यारण्य के ईको सेंसटिव जोन में खनन की अनुमति दी थी। इसके पीछे नदी किनारे बसे गांवों को बाढ़ से बचाने का तर्क दिया था। आदेश में साफ था कि यहां से निकलने वाले उपखनिज को एनएच-87 में इस्तेमाल किया जाएगा।
यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था, जहां हाईकोर्ट ने इस आदेश पर स्टे लगा दिया था। इधर विश्वविख्यात 13 वर्षीय पर्यावरणविद् रिद्धिमा पांडे ने इस प्रकरण की शिकायत एनजीटी से की थी।
एनजीटी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए छह सदस्यीय एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण कर आपदा, पर्यावरण नियमों का उल्लंघन, वास्तविक स्थिति आदि की जांच करेगी। इस कमेटी को तीन माह के भीतर जांच पूरी कर 15 नवंबर तक जांच रिपोर्ट एनजीटी को सौंपनी होगी।
हाईपावर कमेटी में ये हैं शामिल
केंद्रीय वन्य पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नोडल अधिकारी, प्रमुख वन संरक्षक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण के सचिव, स्टेट इंवायरनमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी उत्तराखंड, जिलाधिकारी चंपावत, जिलाधिकारी नैनीताल को शामिल किया गया है। इन सभी छह सदस्यों को संयुक्त निरीक्षण करना होगा।
