गाेरखपुर : पूर्व विधायक राजन तिवारी को कोर्ट ने भेजा जेल…जानें पूरा मामला
लखनऊ। पूर्वांचल के हिस्ट्रीशीटर रह चुके श्रीप्रकाश शुक्ला के साथी एवं पूर्व विधायक राजन तिवार को कोर्ट ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। बता दें कि राजन तिवारी को बिहार के रक्सौल से गिरफ्तार किया गया। वह नेपाल भागने की जुगत में था। बता दें कि एसओजी टीम की मदद से गोरखपुर की कैंट …
लखनऊ। पूर्वांचल के हिस्ट्रीशीटर रह चुके श्रीप्रकाश शुक्ला के साथी एवं पूर्व विधायक राजन तिवार को कोर्ट ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। बता दें कि राजन तिवारी को बिहार के रक्सौल से गिरफ्तार किया गया। वह नेपाल भागने की जुगत में था। बता दें कि एसओजी टीम की मदद से गोरखपुर की कैंट कोतवाली पुलिस ने गुरूवार को उसकी गिरफ्तारी की है।
बता दें कि शाम 5:30 बजे उसे दीवानी कचहरी की गैंगस्टर कोर्ट में पेश किया। बता दें कि राजन की तरफ से मेडिकल लगाकर जमानत अर्जी डाली गई थी लेकिन मेडिकल दस्तावेज पूरे न होने के कारण उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त यानि सोमवार पर होगी।
आपको बता दें कि राजन तिवारी बिहार के मोतिहारी जनपद की गोविंदगंज विधानसभा सीट से विधायक थे। उसके खिलाफ यूपी और बिहार में कई आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। बता दें गोरखपुर में राजन तिवारी के खिलाफ 36 अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं।
वह गोरखपुर की कैंट कोतवाली से गैंगस्टर है। इसके अलावा गोरखपुर पुलिस ने राजन तिवारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। इस सम्बन्ध में गोरखपुर के एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि पुलिस टीम राजन को गोरखपुर लेकर आ रही है। उसे देर शाम यहां के कोर्ट में पेश किया जाएगा।
आपको बता दें कि माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला का राजन तिवारी दाहिना हाथ था। श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ गैंगस्टर के केस में नामजद राजन तिवारी के खिलाफ 17 साल से गैरजमानती वारंट जारी होता रहा। बावजूद इसके पुलिस उसकी गिरफ्तारी करने से बच रही थी।
बता दें कि कोर्ट से 100 से ज्यादा वारंट-समन जारी हुए, लेकिन पुलिस ने एक भी नहीं पहुंचाया। जब अधिकारियों को इस बात की सच्चाई पता चली तब आलाधिकारियों ने राजन तिवारी की गिरफ्तारी के लिए रणनीति बनाई। यूपी के 61 माफिया लिस्ट में राजन तिवारी का नाम शामिल था।
साल 1996 में एक हत्याकांड में गोरखपुर की कैंट कोतवाली पुलिस ने राजन तिवारी को नामजद किया था। बताया जा रहा है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने में राजन श्रीप्रकाश शुक्ला का सहयोगी था। वीरेद्र प्रताप शाही पर हमले में राजन तिवारी को नाम भी उजागर हुआ था हालांकि साल 2014 में उसे इस केस से बरी कर दिया गया था।
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