भू-जल की चिंता
भूगर्भीय जल की दूषित होती स्थिति और भूजल जलस्तर लगातार नीचे चले जाने के चलते स्थिति काफी चिंताजनक हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बात का ध्यान रखते हुए इस स्थिति को गंभीर माना है और इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जो कि स्वागत योग्य है। भूगर्भ जल को प्रदूषित होने …
भूगर्भीय जल की दूषित होती स्थिति और भूजल जलस्तर लगातार नीचे चले जाने के चलते स्थिति काफी चिंताजनक हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बात का ध्यान रखते हुए इस स्थिति को गंभीर माना है और इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जो कि स्वागत योग्य है। भूगर्भ जल को प्रदूषित होने से बचाने, इसकी रिचार्जिंग के लिए सरकार ने भूगर्भ जल दूषित करने पर सात साल की सजा और 20 लाख रुपये जुर्माना लगाने के साथ ही सबमर्सिबल लगाने के लिए पंजीकरण कराने के अलावा सरकारी, निजी संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाना भी अनिवार्य कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि भारतवर्ष में कुल पानी के खर्च में से 80 फीसदी सिंचाई के लिए प्रयोग होता है और 7 प्रतिशत पेयजल के लिए। देश में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति में भूजल का हिस्सा 90 प्रतिशत है। 2007 में योजना आयोग द्वारा स्थापित भूजल प्रबंधन विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट में माना गया है कि भूजल के फिर से भरने की गति (रिचार्जिंग) से कहीं ज़्यादा गति से भूजल को निकाला जा रहा है, यानि भूगर्भीय जल के रिचार्ज की स्थिति काफी खराब है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में एक साल में भूजल निकालने की मात्रा 210 बिलियन घन मीटर है, जबकि रिचार्ज न के बराबर। इससे भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसी स्थिति में भूजल संरक्षण और संवर्धन पर पूरा ध्यान देने की जरूरत है। प्राकृतिक रूप से जितना भूजल भर रहा है, उतनी ही मात्रा में भूजल का दोहन करना जरूरी है, मगर ऐसा हो नहीं रहा है। देश में एक बड़ी समस्या भूगर्भीय जल के प्रदूषित होने की है। उद्योगों के चलते बड़ी मात्रा में भूजल दूषित होता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बारे में कानून लाकर उसे सख्ती से लागू करने की मंशा जताई है, जैसा कि इस बारे में फैसला लिया गया है। सरकार ने तय किया है कि व्यावसायिक फर्म, औद्योगिकी आस्थान और उद्योगों के साथ ही थोक उपभोक्ताओं को भी अब भूजल का शुल्क देना होगा। इसके साथ ही यह भी तय होगा कि भूजल की निकासी की सीमा क्या हो और इसके लिए विभाग से अनापत्ति भी लेना होगा।
जाहिर है यह कदम भूगर्भ जल का स्तर नियंत्रित करने में मददगार सिद्ध होंगे। यह बात दीगर है कि बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन कितना हो पाता है, क्योंकि भ्रष्टाचार किसी भी नियम को लागू करने में रोड़ा बन जाता है। उम्मीद की जानी चाहिए उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला भूजल की स्थिति सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा और अन्य राज्य भी इससे प्रेरित होंगे।
