सर्वोच्च सवाल
यह हमारे राजनीतिक दलों की कैसी मजबूरी है कि लंबे आपराधिक इतिहास पर गर्व करने वालों को चुनाव लड़वा दिया जाता है। बाहुबली जैसे शब्दों से उसका गुणगान किया जाता है। कारण फिर चाहे जो भी रहता हो, यह बाहुबली चुनाव जीत भी जाता है और जेल से छूटने के बाद वह विधायिका में बैठा …
यह हमारे राजनीतिक दलों की कैसी मजबूरी है कि लंबे आपराधिक इतिहास पर गर्व करने वालों को चुनाव लड़वा दिया जाता है। बाहुबली जैसे शब्दों से उसका गुणगान किया जाता है। कारण फिर चाहे जो भी रहता हो, यह बाहुबली चुनाव जीत भी जाता है और जेल से छूटने के बाद वह विधायिका में बैठा होता है, और उसी बाहुबली की सरकार अपने कार्यकाल में लगातार घट रहे अपराधों के आंकड़े दे रही होती है! उसे टिकट देने की कौन सी मजबूरी राजनीतिक दल की रहती होगी? क्या अपराधी की जगह उस पार्टी के पास कोई दूसरा योग्य उम्मीदवार नहीं रह गया था? यह सामान्य से सवाल कभी-कभार कुछ संस्थाओं, समाज सेवा से जुड़े लोगों ने राजनीतिक दलों से पूछे भी तो उसके क्या मायने?
मगर इस सवाल को अब देश की सर्वोच्च अदालत ने पूछ लिया है। सवाल वहीं हैं, मगर अब उसका बहुत बड़ा कानूनी आधार है। राजनीति में बढ़ता अपराधीकरण एक गंभीर समस्या तो है ही और इससे निपटने को राजनीतिक दलों व संवैधानिक संस्थाओं की ओर से दखल की जरूरत थी ही। दलों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी के चलते एक उम्मीदवार की आपराधिक पृष्ठभूमि एक गुण के रूप में स्वीकार की जाती है। बाहुबली लंबे समय से भारतीय राजनीति को प्रभावित करता रहा है। अनेक राजनीतिक दल व राजनेता अपने वोट बैंक में वृद्धि के लिए अपराधियों के बाहुबल का उपयोग करते हैं तथा उन्हें संरक्षण देते हैं। आपराधिक गतिविधियों में लगे लोग विशाल चुनावी खर्च के लिए धन उपलब्ध कराते हैं। सामान्यतया मतदाता उम्मीदवार के इतिहास, योग्यता तथा उसके विरुद्ध लंबित मामलों के प्रति जागरूक नहीं होते, आपराधिक प्रवृति के राजनेताओं के विरुद्ध अदालतों में हजारों मामले लंबित हैं। ऐसे में एक ऐसे व्यापक कानून की आवश्यकता है, जो विशेष रूप से दलों में आंतरिक लोकतंत्र के ढांचे और प्रासंगिक प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित करता हो।
अब सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि वे इसका कारण बताएं कि उन्होंने किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को टिकट क्यों दिया? सर्वोच्च अदालत ने राजनीतिक दलों को आदेश दिया कि वो अपने उम्मीदवारों का आपराधिक ब्योरा अपनी वेबसाइट पर डालें। साथ ही यह विवरण फेसबुक और ट्विटर पर भी डाला जाए। इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो पार्टियों पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। बेदाग उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिए जाने का कारण बताया जाए? राजनीतिक का अपराधीकरण रोकने की दिशा में यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा, यह उम्मीद की जानी चाहिए।
