ट्रंप का प्रस्तावित दौरा

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Edited By Amrit Vichar
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा यह तो ट्रंप के आगमन के बाद ही पता चलेगा। मगर दौरे से पहले ट्रंप की बयानबाजी भ्रमित करने वाली है। ट्रंप ने दौरे से पहले जो कहा है, उसका कोई सीधा अर्थ तो …

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा यह तो ट्रंप के आगमन के बाद ही पता चलेगा। मगर दौरे से पहले ट्रंप की बयानबाजी भ्रमित करने वाली है। ट्रंप ने दौरे से पहले जो कहा है, उसका कोई सीधा अर्थ तो नहीं निकलता, मगर इतना जरूर है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसी बड़े नतीजे तक पहुंचने में वक्त जरूर लगेगा।

ट्रंप का कहना था कि वह मोदी को तो पसंद करते हैं, मगर व्यापार समझौते को लेकर अभी कुछ नहीं कह सकते। इतना जरूर है कि कोई छोटा व्यापार समझौता जरूर अमल में आ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप वैसे भी अपनी गोलमोल बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। अमेरिका में ही उनके बयानों में सच-झूठ को लेकर तमाम बातें होती रहती हैं। ट्रंप का यह दौरा व्यावसायिक दृष्टि के इतर राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व वह भारत आकर अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीयों को रिझाना चाहते हैं। जानकारों की नजर में उनके दौरे में भारत-अमेरिकी संबंधों से इतर उनके राजनीतिक निहितार्थ भी छिपे हैं।

बहरहाल दुनिया के राजनयिक एक-दूसरे देशों की यात्रा करते रहते हैं। सो उनके दौरे को भारत में पूरी तरह राजनीतिक रूप ही नहीं देखा जाना चाहिए। भारत की विपक्षी पार्टियां भी ट्रंप के दौरे पर होने वाले खर्च को लेकर पहले ही हमलावर हो चुकी हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी कह चुके हैं कि ट्रंप के स्वागत में 70 लाख भारतीयों के खड़े होने का कोई अर्थ नहीं है। गुजरात सरकार इस दौरे पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, जो गलत है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मुखिया शरद पवार ने यह कहकर सवाल उठाया है कि पिछले कई राष्ट्राध्यक्षों के दौरों को केवल अहमदाबाद तक सीमित कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले चीन और जापान के राष्ट्रपति अहमदाबाद जा चुके हैं। यह तो राजनीति का नियम है कि राजनीतिक दलों को ऐसे किसी भी बड़े आयोजन को लेकर अपना पक्ष तो रखना ही होता है, मगर ट्रंप के दौरे को लेकर देश में राजनीति अभी और तेज होगी यह तय है। हालांकि हमें उम्मीद ट्रंप के सफल दौरे की करनी होगी ताकि भविष्य में भारत-अमेरिकी संबंधों को और मजबूती मिल सके।