सियासत से बचें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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दिल्ली हिंसा मामले में अब सियासत शुरू हो गई है। बात इस मुद्दे पर सियासत की नहीं स्थिति को संभालने और सामाजिक सौहार्द कायम रखने की है। इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समन्यव का जो अभाव दिखा, उससे भी सबक लिए जाने की जरूरत है। मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने …

दिल्ली हिंसा मामले में अब सियासत शुरू हो गई है। बात इस मुद्दे पर सियासत की नहीं स्थिति को संभालने और सामाजिक सौहार्द कायम रखने की है। इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समन्यव का जो अभाव दिखा, उससे भी सबक लिए जाने की जरूरत है। मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिंसा के मामले में गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उधर मुख्यमंत्री केजरीवाल कह रहे हैं कि पुलिस हालात संभालने में विफल रही है। वे सेना को बुलाने की बात कर रहे हैं। हमारे देश में यह परंपरा बन गई है कि किसी समस्या का समाधान राजनीतिक दल एक साथ बैठकर नहीं खोजते, वह भी तब जब बात लोक हित से जुड़ी हो। यहां राजनीति का मतलब बस एक-दूसरे के विरोध से है।

यहां यह बात भी साफ तौर पर निकलकर आती है कि मामले में दिल्ली पुलिस का रवैया गैर जिम्मेदाराना रहा। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि पुलिस को आदेशों का इंतजार नहीं बल्कि कार्रवाई करनी चाहिए। सोमवार को जब दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में आंदोलनकारियों ने पत्थरबाजी की तो पुलिस को कुछ समझ में नहीं आया। उपद्रवी सार्वजनिक, निजी संपत्ति को नष्ट कर रहे थे, मगर दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में पुलिस हिचकिचा रही थी। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें एक दंगाई खुलेआम एक पुलिसकर्मी पर अपना रिवाल्वर तान रहा था। इसके बावजूद पुलिस कुछ करने की स्थिति में नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट का आशय जिस कार्रवाई से है, उसे पुलिस को समझना चाहिए।

दिल्ली पुलिस को देश भर के राज्यों के पुलिस बल एक मॉडल के रूप में देखते हैं। हालांकि, हाल की हिंसा से निपटने में पुलिस अपनी पहचान व प्रतिष्ठा के अनुरूप खरी नहीं उतरी है। कार्रवाई और निष्क्रियता की चरम सीमाएं हैं। दिल्ली की घटना में पेशेवर तरीके से कार्य न कर पाने का दोष पुलिस पर है। नेतृत्व की विफलता भी निश्चित रूप से है। लेकिन राजनीतिक दल पुलिस को अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक साधन के रूप में उपयोग करने के दोष से क्या बच सकते हैं? इस पूरे मामले में अब राजनीति से ऊपर उठकर आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि हमारा देश किसी भी समस्या के समाधान के लिए सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखते हुए एक साथ चलने की क्षमता रखता है।