दंगों का ऐसा रूप
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फैली सांप्रदायिक हिंसा के कुछ थमने पर गुरुवार को जब मीडिया हिंसाग्रस्त इलाकों में पहुंची तो नजारे भयावह, डरावने और हैरान कर देने वाले थे। ऐसा लग रहा था जैसे इन इलाकों में मानवता को तिलांजलि दे, इंसानी रिश्तों को ही आग के हवाले किया गया। वहां बर्बादी के बाद बचे सबूतों …
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फैली सांप्रदायिक हिंसा के कुछ थमने पर गुरुवार को जब मीडिया हिंसाग्रस्त इलाकों में पहुंची तो नजारे भयावह, डरावने और हैरान कर देने वाले थे। ऐसा लग रहा था जैसे इन इलाकों में मानवता को तिलांजलि दे, इंसानी रिश्तों को ही आग के हवाले किया गया। वहां बर्बादी के बाद बचे सबूतों के अलावा देखने को कुछ नहीं था। कहीं-कहीं आग से उठता धुआं इस बात की ताकीद कर रहा था कि अभी-अभी वहां क्या घटित हुआ होगा। देश की राजधानी की यह भयावह तस्वीर अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है।
इन दंगों का जिम्मेदार कौन? एक पल में कई परिवारों की खुशियां छिन गईं, मौत का ऐसा खेल आखिर किनके इशारों पर खेला गया? जिन घरों में पत्थर, पेट्रोल बम मिले हैं, वह वहां तक कैसे पहुंचे? वक्त रहते इन बातों का पता क्यों नहीं चल पाया? सवाल तो अनेक हैं, मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली को दहलाने वाले इन दंगों को अंजाम देने वालों तक क्या कानून पहुंच पाएगा? इन दंगों में करीब 35 से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? और तो और दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल और इंटेलीजेंस ब्यूरो के एक अफसर भी इन दंगों की भेंट चढ़ जाते हैं जो कि इन दंगों को ही रोकने गए थे। उनका यह बलिदान आखिर किस कारण? दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसा भीड़तंत्र, कैसे पनपा। कौन थे वो लोग जो इस देश में अमन शांति कायम नहीं देखना चाहते।
इस पूरे मामले में एक पार्षद के घर की छत से बड़ी मात्रा में पेट्रोल बम, ईंटे आदि मिले हैं। सवाल यह है कि पत्थर आखिर छत तक पहुंचे कैसे? किसी ने साजिशन ऐसा किया है अथवा सच्चाई कुछ और है। इन मामलों की निष्पक्ष जांच तो होनी ही चाहिए। दो पक्षों के बीच भड़काऊ भाषण देकर दिल्ली को जलाने वाले कौन थे, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है, देश इस बात का सच जानना चाहता है। एक स्वस्थ, पढ़े-लिखे समाज में जलती गाड़ियों, टूटती दुकानों, छतों से उछलते पत्थर, नालों से निकलती लाशों का दृश्य आखिर कब तक? उपद्रवियों के इस अधर्म पर सरकार को अपना निष्पक्ष जांच तंत्र सामने लाकर देश को बताना होगा कि दिल्ली के दिल में यह घाव किसने और किस मकसद से दिया? उम्मीद है दिल्ली शांति की ओर बढ़े और दंगों के पीछे का सच भी जल्द सामने आए।
