दिल्ली हिंसा के बाद
दंगाग्रस्त दिल्ली में शव मिलने का सिलसिला जारी है। गृह मंत्रालय दावा कर रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। जबकि अब तक मौत का आंकड़ा 43 के ऊपर पहुंच चुका है। रविवार को गोकुलपुरी इलाके से तीन शव बरामद हुए हैं। दिल्ली पुलिस की चूक की वजह से ही राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र के …
दंगाग्रस्त दिल्ली में शव मिलने का सिलसिला जारी है। गृह मंत्रालय दावा कर रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। जबकि अब तक मौत का आंकड़ा 43 के ऊपर पहुंच चुका है। रविवार को गोकुलपुरी इलाके से तीन शव बरामद हुए हैं। दिल्ली पुलिस की चूक की वजह से ही राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र के प्रति अविश्वास का माहौल बना।
केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल ने सॉलिसिटर-जनरल को न्यायिक जांच से बचाने के लिए मैदान में उतारा। उन्होंने अदालत में कहा कि भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। विचित्र तर्क दिया कि इससे माहौल बिगड़ेगा। इस तर्क से सार्वजनिक हो गया कि पार्टी के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार हिचकिचा रही है।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद ताहिर हुसैन पर हत्या में शामिल होने और उनके घर की छत पर लाठी, पत्थर और पेट्रोल बम रखने का आरोप लगाया। आप ने उन्हें सदस्यता से निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया। पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए दिल्ली हिंसा के मामलों में 630 लोगों को हिरासत में लिया है।
विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध ने कई स्थानों पर सांप्रदायिक मोड़ लिया। इकट्ठा होने और विरोध करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था को ध्वस्त करके इस अधिकार का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना पुलिस का कर्तव्य है कि लोगों को दी गई संवैधानिक गारंटी को बरकरार रखा जाए। साथ ही तय किया जाए कि सामान्य लोगों का जीवन और कामकाज सामान्य रूप से चलता रहे।
यह सोच आम है कि यदि प्रशासन चाहे तो किसी भी सूरत में दंगा नहीं हो सकता। सवाल है कि दिल्ली पुलिस या प्रशासन ने दंगा प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द पहुंचकर शांति बहाल करने की कोशिश क्यों नहीं की? इसी के चलते केन्द्र को सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने में लोगों के विश्वास की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
निष्पक्ष कार्रवाई से ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल की जा सकती है। यह जांच का विषय है कि दिल्ली में हुई हिंसा किसी साजिश का हिस्सा थी। हालात सामान्य होने पर घरों से लापता लोगों का पता लगाने, पलायन कर गए लोगों की वापसी व उजड़ गए लोगों के पुनर्वास का काम तेजी से होना चाहिए।
