कोरोना का नाजुक मोड़
कोरोना वायरस से लड़ाई अब नाजुक मोड़ पर है। इस जानलेवा वायरस की चपेट में आकर विश्वभर में 4623 लोगों की मौत हो चुकी है और 125,841 लोग इस वायरस से जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 73 हो गई है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य …
कोरोना वायरस से लड़ाई अब नाजुक मोड़ पर है। इस जानलेवा वायरस की चपेट में आकर विश्वभर में 4623 लोगों की मौत हो चुकी है और 125,841 लोग इस वायरस से जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 73 हो गई है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में गुरुवार को इस बात का खुलासा किया है कि स्क्रीनिंग में निगेटिव पाए गए लोगों में बाद में संक्रमण का केस पनप सकता है। थर्मल स्क्रीनिंग में रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी निगरानी पीरियड में कोरोना के लक्षण दिख सकते हैं। इस लिहाज से कोरोना को बाहर से आने के लिए रोकना हैं तो कड़े उपाय करने ही होंगे, जैसा कि अन्य देश भी कर रहे हैं।
अमेरिका ने ब्रिटेन को छोड़कर यूरोप के बाकी सभी देशों से अमेरिका आने वाले लोगों पर 30 दिनों के लिए रोक लगा दी है। अमेरिका ने इससे पहले चीन और ईरान की यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। केवल एयरपोर्ट पर बाहर से आए यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग ही काफी नहीं है बल्कि देश में जो मामले पॉजीटिव पाए गए हैं, उनकी निगरानी के साथ ही कोशिश यह होनी चाहिए कि बाहरी देशों से नागरिकों का प्रवेश कुछ समय के लिए बंद हो। हालांकि सरकार ने बाहरी देशों से आने वाले लोगों का वीजा 15 अप्रैल तक स्थगित करने का फैसला लिया है, मगर जरूरत इससे और आगे बढ़कर सुरक्षा उपाय करने की है। देश के भीतर ही जब 73 मामलों के पॉजीटिव होने के साथ खतरा मौजूद है तो पहले उससे निपटना होगा।
बाहर से किसी भी सूरत में कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति देश में न पहुंचे इसके लिए उपाय करना जरूरी है। जब खुद स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि खाली स्क्रीनिंग में वायरस नेगेटिव है इसका मतलब यह नहीं है कि वो दो दिन के बाद पॉजिटिव नहीं हो सकता। वायरस को लेकर बचाव के जरूरी उपाय करने के साथ ही इस बात की तह तक भी पहुंचना होगा कि आखिर चूक हुई कहां और कैसे पॉजीटिव मामले देश में पहुंच गए।
जाहिर है इस वायरस को लेकर तमाम देशों की निष्क्रियता भी चिंता का विषय है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अब कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है। अब से पहले डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस को महामारी नहीं कहा था। महामारी उस बीमारी को कहा जाता है जो एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों में फैल रही हो। डब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष डॉ. टेडरोज़ आध्यनोम गेब्रेयेसोस ने अब कोरोना वायरस के लिए महामारी शब्द का इस्तेमाल िकया है। उनकी बात से समझना होगा कि यह खतरा िकसी एक देश के िलए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए है जिसके लिए वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करना ही होगा।
