आतंक को करारा जवाब
जम्मू-कश्मीर में कुछ वक्त की शांति के बाद रविवार को आतंकियों ने फिर नापाक हरकत करने की कोशिश की मगर वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाए। सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने चार आतंकवादियों को मार गिराया। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के …
जम्मू-कश्मीर में कुछ वक्त की शांति के बाद रविवार को आतंकियों ने फिर नापाक हरकत करने की कोशिश की मगर वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाए। सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने चार आतंकवादियों को मार गिराया। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी शामिल थे। मुठभेड़ में एक हिज्बुल का कमांडर तारीक अहमद भी मारा गया। तीनों लश्कर के आतंकी भी मारे गए हैं। इस मुठभेड़ के बाद अनंतनाग और कुलगाम में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
यह देखने में आया है कि जम्मू-कश्मीर में जब भी स्थिति सामन्य होने की ओर बढ़ती है वहां आतंकी कोई न कोई वारदात कर घाटी को फिर अस्थिर करने की कोशिश करते हैं। उनकी कोशिश के पीछे पाकिस्तानी फौज का पूरा सहयोग रहता है। अप्रत्यक्ष रूप से आतंकियों को पाकिस्तान की मदद इस बात की तरफ इशारा करती है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य बनी रहे।
अभी कुछ समय पूर्व ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं सुचारु की हैं। आज की घटना के बाद दो स्थानों पर फिर से इंटरनेट सेवाएं ठप्प करनी पड़ी हैं। जाहिर है सोशल मीडिया को अब भी आतंकी अपना हथियार बनाकर किसी न किसी रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवादी किसी भी घटना को अंजाम देने से पहले घाटी के ही किसी गांव में पहुंचते हैं, वहां रुकते और छिपते हैं। बिना स्थानीय सहयोग के तो ऐसा संभव नहीं है। लिहाजा घाटी में ऐसे लोग भी चिन्हित करने होंगे जो हमारे देश में रहते हुए पाकपरस्ती में लिप्त हैं।
इससे पहले भी जब-जब आतंकियों से मुठभेड़ हुई है वह घाटी के किसी गांव में ही पनाह लिए हुए मिले थे। 9 मार्च को जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। सेना, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस को आतंकियों के गांव में ही छिपे होने का इनपुट मिला था। हालांकि यह हमारी सरकार की सफलता है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद तमाम कोशिशों के बावजूद आतंकी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे पाने में सफल नहीं हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर की सामान्य होती स्थिति आतंकवादियों और पाकिस्तान के लिए जैसे खीझ पैदा करने जैसी होती है, जिसके बाद आतंकी किसी न किसी घटना के लिए यहां पहुंचते हैं। घाटी में स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है, और जनजीवन पटरी पर लौट चुका है। अलगाववादियों को नजरबंद करने के अलावा वहां सब कुछ सामान्य है। जाहिर है यह बात आतंकियों को रास नहीं आ रही है। इसीलिए वह कुछ न कुछ घटित करने पर आमादा हैं। मगर हमारी सेनाएं चुस्त हैं और वह किसी भी बात का जवाब देने के लिए तैयार और सक्षम हैं।
