महिला अधिकारों की जीत
थल सेना के बाद अब नौसेना में भी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलेगा। मंगलवार को उच्चतम न्यायालय का इस आशय का फैसला आने के बाद थल सेना के बाद नौसेना में भी महिला अधिकारियों ने अपने अधिकारों की लड़ाई जीत ली। उच्चतम न्यायालय ने न केवल उन्हें उनका हक दिलाया बल्कि सरकार की इस …
थल सेना के बाद अब नौसेना में भी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलेगा। मंगलवार को उच्चतम न्यायालय का इस आशय का फैसला आने के बाद थल सेना के बाद नौसेना में भी महिला अधिकारियों ने अपने अधिकारों की लड़ाई जीत ली। उच्चतम न्यायालय ने न केवल उन्हें उनका हक दिलाया बल्कि सरकार की इस मामले में आलोचना भी की, कि महिला अधिकारों पर उसका रवैया असंतोषजनक था। महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले महीने थल सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के बाद अब नौसेना में स्थायी कमीशन का सुप्रीम आदेश आया है।
महिला सशक्तिकरण और समानता की बात करने वाले हमारे देश में इस मुद्दे पर बातें ज्यादा और व्यावहारिकता में निर्णय कम ही होते हैं। महिला अधिकारियों को यहां कमतर निगाह से देखा जाता है। अब जबकि महिला पायलट लड़ाकू जहाज उड़ा रही हैं, एयर इंडिया ने अपने बोइंग की कमान तीनों महिला कैप्टन को दी, अंतरिक्ष में महिलाएं अपना परचम लहरा चुकी हैं, तो इस दलील के कोई मायने नहीं थे कि नौसेना में मौजूद रूसी जहाजों में महिलाओं के लिए खास तरह की सुवधाएं मौजूद नहीं थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि नौसेना में कई बार महिला अधिकारियों ने देश को गौरवान्वित करने का काम किया है और उनके योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है। अगर पानी के जहाजों में महिला अधिकारियों की तैनाती से संबंधित कुछ व्यावहारिक दिक्कतें थीं तो उन्हें दूर किया जा सकता है, मगर केवल इस बात को आधार बनाकर हम महिला अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषय से मुंह नहीं मोड़ सकते, इसी बात का उच्चतम न्यायालय ने भी संज्ञान लिया है। महिला सुरक्षा दस्ता जब सीमा पर निगरानी कर सकता है तो फिर उससे बड़ी तो कोई जिम्मेदारी नहीं हो सकती। ऐसे में नौसेना में उन्हें स्थायी कमीशन नहीं मिलना महिला अधिकारों की अनदेखी ही था।
उच्चतम न्यायालय का कहना कि ‘यह वक्त की जरूरत है और आर्म्ड फोर्स में लैंगिक समानता नहीं देने के 101 बहाने नहीं हो सकते, पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ सामान व्यवहार होना चाहिए।’ यह फैसला कई और मामलों में भी महिला अधिकारों की रक्षा के लिए नजीर बनेगा ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। बहरहाल अब देश की तीनों सैन्य सेवाओं में महिला अधिकारियों को उचित सम्मान मिल चुका है जो कि महिला अधिकारों की बड़ी जीत है।
