लिटमस में पास देश
रविवार को कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए लोगों ने खुद को सामाजिक सुरक्षा अभ्यास के तहत घरों में कैद रखा। हालांकि लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारी सड़कों पर रहे। कहा जा सकता है कि देश भर में ‘जनता कर्फ्यू’ कॉल को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। जनता कर्फ्यू व कर्फ्यू …
रविवार को कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए लोगों ने खुद को सामाजिक सुरक्षा अभ्यास के तहत घरों में कैद रखा। हालांकि लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारी सड़कों पर रहे। कहा जा सकता है कि देश भर में ‘जनता कर्फ्यू’ कॉल को अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
जनता कर्फ्यू व कर्फ्यू में अंतर है। लोगों का लोगों के लिए खुद पर लगाए कर्फ्यू को जनता कर्फ्यू कहा जा सकता है। ऐसे में यदि आप घर से निकलते हैं तो आप पर कोई कार्रवाई नहीं होती। सो यह कहना कि लोग डर के कारण घरों से नहीं निकले उचित नहीं जान पड़ता।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आह्वान किया था कि लोग जनता कर्फ्यू का हिस्सा बनें, जो कोविड-19 के खतरे के खिलाफ लड़ाई में जबरदस्त ताकत देगा। प्रधानमंत्री के आह्वान पर एकजुटता के साथ देशवासियों ने कोरोना वायरस चुनौती को स्वीकार करने में तत्परता दिखाई और देश इस लिटमस टेस्ट में पास हुआ। जनता कर्फ्यू को मिले व्यापक जन समर्थन से साबित हो गया कि संकट की घड़ी में देश एक साथ खड़ा है। क्योंकि कोरोना के मामले में उपचार से ज्यादा जरूरी उससे बचाव है।
सभ्य समाज के रूप में नागरिकों ने साबित कर दिया कि वे खुद स्वस्थ रहने के साथ समाज को भी स्वस्थ रखने के प्रति जागरूक हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि लोगों को आगे भी जनता कर्फ्यू जैसे कार्यक्रमों के लिए तैयार रहना होगा। सही बात है अच्छे भविष्य के लिए हमें इस परीक्षा में सौ प्रतिशत अंकों के साथ पास होना पड़ेगा।
उधर रविवार को देश में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर 324 हो गई। जनता कर्फ्यू का असर पड़ोसी देशों में भी पड़ा है। श्रीलंका ने सोमवार सुबह 6 बजे तक देशव्यापी कोरोना कर्फ्यू लगाने की घोषणा की है। मगर जनता कर्फ्यू या लाक डाउन क्या फुलप्रुफ उपाय है? इससे प्रधानमंत्री के आह्वान का देशव्यापी असर माप तो लिया गया। लेकिन क्या इतने भर से वायरस की चेन टूट जाएगी।
ऐसे में सवाल है कि कोरोना ने इटली, ईरान की तरह भारत में भयावह रूप ले लिया, तब हम क्या करेंगे? जबकि हमारे पास कोरोना वायरस टेस्ट के वास्ते पर्याप्त मात्रा में किट भी नहीं है। एक लाख टेस्ट किट एक अरब 32 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए मजाक ही तो हैं। हम दस लाख किट विश्व स्वास्थ्य संगठन से मांग रहे हैं। हमारे यहां अपेक्षित संख्या में डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में क्या कोरोना से मुकाबले के वास्ते भारत पूर्ण रूप से तैयार है? अंतरिक्ष में विकसित देशों से होड़ लेने वाला देश वायरस पर शोध व नियंत्रण के मामले में फिसड्डी क्यों है?
