अब न चेते तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर मंगलवार रात 12 बजे से पूरे देश में लॉकडाउन करने की घोषणा की। लोगों के घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कुछ लोगों की लापरवाही पूरे देश को मुश्किलों में झोंक देगी। जाहिर है कि देश …
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर मंगलवार रात 12 बजे से पूरे देश में लॉकडाउन करने की घोषणा की। लोगों के घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कुछ लोगों की लापरवाही पूरे देश को मुश्किलों में झोंक देगी। जाहिर है कि देश में कोरोना को लेकर हालात देश में सामान्य नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र वह हर कार्य कर रहा है, जो कर सकता है। कहा जा सकता है कि समय रहते देश में महामारी के आकार का पूर्वानुमान लगाने का प्रयास नहीं किया गया।
अमेरिका की दो स्वतंत्र अनुसंधान संस्थाओं ने भारत की महामारी के जो पूर्वानुमान लगाएं हैं, उनके अनुसार यात्राओं पर अंकुश पूरी तरह न लग पाने व लॉकडाउन सफल न रहने पर आगामी मई माह तक अस्पताल में दाखिल किए जाने वाले लोगों की संख्या कई लाख हो सकती है। ऐसे में नागरिकों का सहयोग बहुत जरूरी है। आज के हालात में सामाजिक दूरी बरतना एकमात्र वैसा असरदार उपाय है, जो इस वायरस को बढ़ने से रोक सकता है।
देश में महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए तेजी से, विस्तारित परीक्षण और संगरोध की आवश्यकता है। रोगियों का पता लगाने के लिए पूरे देश में परीक्षण केंद्रों का विस्तार करने की जरूरत है। फिलहाल देश में कोरोना वायरस के परीक्षण के लिए लगभग 100 सरकारी प्रयोगशालाएं और 12 निजी प्रयोगशालाएं स्वीकृत हैं। आने वाले दिनों में और निजी लैब को मंजूरी देने की जरूरत है। स्थिति की गंभीरता को इस बात से सहज ही आंका जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक सप्ताह के भीतर दो बार देश के लोगों को संबोधित कर चुके हैं।
उधर विवशता में ही सही लोग पुलिस-प्रशासन को सख्ती बरतने पर मजबूर कर रहे हैं। दुखद है कि लोग अब भी गैर जिम्मेदार ढंग से व्यवहार कर रहे हैं। सड़कों पर भीड़ भरी आवाजाही बदस्तूर जारी है। जबकि इस पर रोक लगनी चाहिए। हमें समझना होगा कि यह आपदा का वक्त है। संकट का समय है। इसे रुकना ही चाहिए। संयमित जीवन व्यवहार से ही इससे बचा जा सकता है। सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
सरकार के दिशा-निर्देशों के अलावा हमें स्वयं भी संयमित, संकल्पित होकर समझदारी से काम लेना होगा। यह वक्त दिन भर घर रहने के बाद शाम की चहल-कदमी, सुबह की घूम टहल का नहीं है। मामले की गंभीरता को समझते हुए कोरोना से लड़ाई में हम सबका सहयोग जरूरी है। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें संकटकाल में पूर्ण संयम एवं अनुशासित व्यवहार का परिचय देना चाहिए।
