कोरोना के खिलाफ
कोरोना संक्रमण की भयावहता के चलते देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन का गुरुवार को दूसरा दिन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन की घोषणा के बाद ऐसे वीडियो वायरल हुए जो लॉकडाउन के तुरंत बाद दुकानों की ओर जाने और सामान खरीदने की होड़ वाले लोगों के थे। दूसरी तरफ ऐसी खबरें भी लगातार …
कोरोना संक्रमण की भयावहता के चलते देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन का गुरुवार को दूसरा दिन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन की घोषणा के बाद ऐसे वीडियो वायरल हुए जो लॉकडाउन के तुरंत बाद दुकानों की ओर जाने और सामान खरीदने की होड़ वाले लोगों के थे। दूसरी तरफ ऐसी खबरें भी लगातार आती रही हैं कि गरीब, मजदूर वर्ग के भोजन का प्रबंध कैसे होगा?
इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक्शन मोड आ गई है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कोरोना संकट से निपटने के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी गरीब को भूखा नहीं सोने देगी। लॉकडाउन की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ने कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों को इस परिस्थिति से निपटने के लिए पहले ही तैयार रहने के लिए भी कहा था। अब वित्त मंत्री की यह घोषणा निम्न वर्ग के लोगों के लिए राहत भरी खबर है।
मगर इस घोषणा के साथ ही सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संक्रमण के बीच जरूरतमंदों तक जरूरी सामान पहुंचाना होगी। जाहिर है ऐसे में जरूरत राज्य सरकारों के साथ समन्वय के साथ काम करते हुए एक ऐसा तंत्र विकसित करने की होगी जो 14 अप्रैल तक बिना कोरोना संक्रमण की चपेट में आए जरूरतमंदों तक पहुंचकर उन्हें राशन आदि मुहैया कराए। सरकार ने गरीब तबके को ध्यान में रखते हुए तमाम घोषणाएं की हैं, मगर कोरोना की चुनौती अपनी जगह खड़ी है।
प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि सबसे पहले स्वास्थ्य, बाकी बातें बाद की। जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन में पिछले दिनों से अब तक जो बात देखने में आ रही है, उससे लॉकडाउन की सफलता पर संदेह जरूर होता है। सुबह होते ही लोग सामान की खरीद के लिए घरों से निकल रहे हैं, शहरी क्षेत्रों के अलावा कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। यहां घरेलू गैस सिलेंडर के लिए भी लोग लंबी लाइन में खड़े दिख रहे हैं।
ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने की कोशिशों के कोई मायने नहीं रह जाते हैं। लिहाजा सरकार की कोशिश यह होनी चाहिए कि सुरक्षित तरीके से लोगों के बीच तक मदद और जरूरी चीजें पहुंचें। कोरोना के खतरनाक संक्रमण को देखते हुए जरा सी भी चूक बड़ी लापरवाही के रूप में सामने आ सकती है।
बहरहाल केंद्र सरकार ने गुरुवार को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए तमाम घोषणाएं की हैं और उसके कदमों का स्वागत किया जाना चाहिए। 130 करोड़ जनसंख्या वाले देश में कोरोना अभी तीसरी स्टेज में नहीं पहुंचा यह गनीमत है, ऐसे में लोगों की जिम्मेदारी है कि वह सरकार के निर्देशों का सही तरीके से पालन कर अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाएं।
