महामारी से जंग
कोरोना संक्रमण के खिलाफ शुक्रवार को सेना ने भी उतरने का ऐलान किया तो इस महामारी का फैलाव रोकने और नियंत्रण की दिशा में बड़ा निर्णय सामने आया। सेना का किसी भी ऑपरेशन में शामिल होने का अर्थ है कि सेना की ओर से युद्धस्तर पर तैयारी जैसा कि सेना प्रमुख की ओर से कहा …
कोरोना संक्रमण के खिलाफ शुक्रवार को सेना ने भी उतरने का ऐलान किया तो इस महामारी का फैलाव रोकने और नियंत्रण की दिशा में बड़ा निर्णय सामने आया। सेना का किसी भी ऑपरेशन में शामिल होने का अर्थ है कि सेना की ओर से युद्धस्तर पर तैयारी जैसा कि सेना प्रमुख की ओर से कहा भी गया है। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार को सेना की ओर से ‘ऑपरेशन नमस्ते’ का ऐलान किया है जिससे कोरोना के खिलाफ जंग में विजय पाई जा सके।
सेना के इस ऐलान के बाद आर्मी अस्पतालों को सिर्फ छह घंटों की सूचना पर कोविड-19 मरीजों के लिए 45 बेड के आइसोलेशन वार्ड और 10 बेड के आइसीयू वॉर्ड में बदल दिया जाएगा। जिन इलाकों में कोरोना का असर ज्यादा है, वहां के 30 प्रतिशत फील्ड अस्पतालों को तैयार रहने को कहा गया है। सेना ने तुरंत एक्शन के लिए क्विक रिएक्शन मेडिकल टीमें गठित की हैं जो सूचना मिलने के छह घंटे के अंदर मरीज को अस्पतालों तक पहुंचाने को तैयारी कर लेंगी। सेना के इस महामारी के खिलाफ युद्ध में उतरने का फायदा यह होगा कि देशभर के आर्मी अस्पतालों में मरीजों को अलग से सुविधाएं मौजूद मिलेंगी।
इसके अलावा सेना ने अपनी सभी कमांड स्टेशनों के आपातकालीन नंबर भी जारी किए हैं जिससे कोरोना के किसी भी केस के मामले में पता लग सके और फौरी उपचार शुरू हो सके। इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर भी शुक्रवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था के उपचार के लिए तमाम घोषणाएं की, जिससे आर्थिक व्यवस्था पर नियंत्रण के साथ ही आम आदमी को भी काफी राहत मिलेगी।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद रिजर्व बैंक ने जो घोषणाएं की हैं उनमें सबसे बड़ी राहत यह है कि आम आदमी को अगले तीन महीनों तक अब बैंक लोन के ईएमआई की किश्त चुकाने की चिंता नहीं रहेगी। बैंक ने नगदी की तंगी दूर करने और कर्ज सस्ता करने के लिए नगदी कर्ज पर ब्याज की दर रेपो और बैंकों के आरक्षित नगदी अनुपात (सीआरआर) में बड़ी कटौती जैसे कई उपायों की भी घोषणा की।
इस वक्त देश और दुनिया के जो हालात हैं उससे कोरोना के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए जा रहे हर कदम से कोरोना के खिलाफ जंग के साथ ही सरकार की कोशिश आम आदमी को राहत पहुंचाने की भी है। 21 दिन तक लॉकडाउन की अवधि कोई कम समय नहीं है। ऐसे में एक तरफ मोर्चा कोरोना संक्रमण रोकने, कोरोना संक्रमितों का ध्यान रखने की तरफ है तो दूसरी ओर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में शामिल देशवासियों का भी ध्यान रखने की जरूरत है, जैसा कि सरकार की ओर से किया जा रहा है। ऐसे में सरकार को कम से कम इतना तो भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि जनता हर कदम पर उसके साथ खड़ी है।
