गंभीर लापरवाही
कोरोना की तीसरी स्टेज के मुहाने पर खड़े देश के लिए यह बात खतरनाक है कि दिल्ली निजामुद्दीन तब्लीगी जमात में शामिल 6 लोगों की मौत हो चुकी है। देश के लिए यह बड़ा खतरा जब तक सामने आया तब मालूम हुआ कि जमात में करीब दो हजार लोग मौजूद थे वह भी बाहरी देशों …
कोरोना की तीसरी स्टेज के मुहाने पर खड़े देश के लिए यह बात खतरनाक है कि दिल्ली निजामुद्दीन तब्लीगी जमात में शामिल 6 लोगों की मौत हो चुकी है। देश के लिए यह बड़ा खतरा जब तक सामने आया तब मालूम हुआ कि जमात में करीब दो हजार लोग मौजूद थे वह भी बाहरी देशों से आए हुए ज्यादा। यह बात भी सामने आ रही है कि जमात में शामिल कई बाहरी नागरिकों के वीजा में गड़बड़ी भी मिली है।
कोरोना के खतरे के बीच यह कैसी घोर लापरवाही? खुफिया तंत्र पर क्या यह सीधा सवाल नहीं है? वीजा गड़बड़ी तो बाद का विषय है, अगर इनकी वजह से स्थिति खराब होती है तो उसके लिए जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा? बाहरी देशों से लोग यहां पहुंचे, कोरोना के चलते लॉकडाउन की स्टेज और देश की राजधानी में लोगों का इतना बड़ा जमावड़ा! बात हैरानी के साथ-साथ परेशान करने वाली भी है।
अब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान जमात ने नियमों को तोड़कर अपराध किया है। हालांकि जमात में शामिल लोगों के वकील का कहना है कि लॉकडाउन के चलते लोगों को घर भेजने के लिए दिल्ली सरकार से इजाजत मांगी गई थी। यह तो जांच का विषय है मगर, इस लापरवाही को बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अब तब्लीगी जमात में शामिल हुए दो हजार लोगों की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के 18 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इस जमात में हिस्सा लेने वाले तेलंगाना के छह लोगों की मौत हो गई। उन सभी का कोरोना वायरस परीक्षण पॉजिटिव निकला था। मंगलवार को मरकज से 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तब्लीगी जमात से जुड़े हुए लोगों की तेजी से तलाश किए जाने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा कि वे जहां मिले उन्हें तत्काल कोरेन्टाइन किया जाए।
सवाल है कि प्रशासन और पुलिस ने समय रहते वहां ठहरे लोगों को क्यों नहीं हटाया। जबकि मंदिर व मस्जिदों पर तब से ताला पड़ा है। निजामुद्दीन पुलिस थाना मरकज के नजदीक ही है। क्या ऐसा हो सकता है कि वहां इतने लोगों की मौजूदगी की पुलिस को खबर ही न हो। क्या यह दिल्ली पुलिस और प्रशासन की नकामी नहीं है।
निजामुद्दीन के जमात में शामिल होने आए विदेशियों को मेडिकल जांच के बिना प्रवेश क्यों करने दिया गया? यह प्रशासन की अकर्मण्यता नहीं है तो क्या है। इस मामले में दिल्ली पुिलस की भूमिका से लेकर खुफिया विभाग की जिम्मेदारी के बारे में जांच की जानी चाहिए। बेहद गंभीर विषय का केंद्र सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।
