कृषि उपज का सवाल

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना महामारी से निपटने को जारी लॉकडाउन के कारण श्रमिकों की कमी के चलते विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में भी कमी की रिपोर्ट आ रही हैं। ऐसी स्थिति में जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी बढ़ने की आशंका है। सरकार की ओर से आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। …

कोरोना महामारी से निपटने को जारी लॉकडाउन के कारण श्रमिकों की कमी के चलते विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में भी कमी की रिपोर्ट आ रही हैं। ऐसी स्थिति में जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी बढ़ने की आशंका है। सरकार की ओर से आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। इन उपायों के तहत स्टॉक सीमा तय करने, मूल्यों का निर्धारण, उत्पादन बढ़ाना आदि शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने देश भर में जारी पूर्णबंदी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों से आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करने को कहा है। यह परेशानी में फंसे लोगों को राहत देने वाली खबर है। इससे पहले मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश में खाद्य पदार्थों, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण और उत्पादन की अनुमति दी थी। साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान किसानों को परेशानी से बचाने के लिए कई उपाय किए हैं।

सरकार की चिंता है कि कृषि उपज व अन्य संबंधित वस्तुओं का परिवहन निर्बाध होना चाहिए। निर्यात योग्य कृषि उपज बाहर भेजने में किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसानों की समस्याओं की सुनवाई के लिए कंट्रोल रूम बनाकर नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कोशिश होनी चाहिए कि किसान की कृषि उपज खेत के पास ही बिक सके, साथ ही इसका राज्य और अंतरराज्यीय परिवहन सुगमता से हो। आगे बुआई भी होनी है, सो खाद-बीज की कमी कहीं भी नहीं होनी चाहिए।

किसानों और उनकी उपज के बारे में सरकार की चिंता वाजिब है। गेहूं की कटाई शुरू हो चुकी है परंतु श्रम संसाधनों की कमी बनी हुई है। अप्रैल के मध्य तक अनाज पैकिंग के लिए तैयार होने की संभावना है। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण, जूट मिलें जूट बैग का उत्पादन करने में असमर्थ हैं। सो किसानों को खाद्यान्नों की पैकेजिंग की समस्या का सामना भी करना पड़ेगा। ऐसे में गेहूं किसानों को परेशानी से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किया जाना जरूरी है। दरअसल लॉकडाउन की अवधि में खेती-किसानी के लिए किसी भी तरह की कोई ठोस गाइड लाइन नहीं आई है।

किसानों को सुविधाएं दिया जाना इसलिए भी जरूरी है कि लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके और किसानों व आम जनता को कोई परेशानी न उठानी पड़े। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उठाए गए कदमों पर सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है। इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करके आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। किसान की उपज बर्बाद न हो, उसे उसकी उपज का वाजिब दाम मिले यह सुनिश्चित करना ही होगा। बहरहाल, कोरोना जैसी महामारी के बीच कुछ ऐसी ही आवश्यक चीजों के बारे में सरकार को विचार करना होगा।