तंत्र के खिलाफ

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कोरोना महामारी से लड़ रही जंग में इस वक्त चिकित्सक, चिकित्सा कर्मियों के बाद सबसे बड़ी भूमिका हमारे सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी निभा रहे हैं। लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करवाना हो या फिर जनता को फौरी मदद की बात, पुलिस कर्मी खुद को खतरे में डालकर लोगों की सहायता कर रहे हैं। ऐसे …

कोरोना महामारी से लड़ रही जंग में इस वक्त चिकित्सक, चिकित्सा कर्मियों के बाद सबसे बड़ी भूमिका हमारे सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी निभा रहे हैं। लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करवाना हो या फिर जनता को फौरी मदद की बात, पुलिस कर्मी खुद को खतरे में डालकर लोगों की सहायता कर रहे हैं। ऐसे में कई स्थानों पर लोग बेवजह पुलिस कर्मियों से उलझकर व्यवस्था में व्यवधान पैदा कर रहे हैं। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि पुलिस कर्मी लॉकडाउन की अवधि में अगर जनता से घरों से बाहर नहीं निकलने को कह रहे हैं तो इसमें समाज की ही भलाई है। मगर कई लोग मानने को राजी नहीं हैं।

पुलिस कर्मियों के साथ उलझने की तमाम छोटी-बड़ी घटनाओं के बीच पंजाब के पटियाला में रविवार को जो खबर आई उसने समाज के बारे में एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया। यहां सिख निहंगों से पुलिस ने कर्फ्यू पास मांगा तो पुलिस कर्मियों पर हमला हो गया। इस हमले में न केवल पुलिस कर्मी घायल हुए हैं बल्कि एक एएसआई के हाथ की कलाई कटकर अलग हो गई जो कि अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। पुलिस कर्मियों ने केवल पास के बारे में पूछताछ की थी। घटना के बाद डेरे के गुरुद्वारे में पुलिस कमांडो और सिख निहंगों के बीच आमने-सामने गोलाबारी भी हुई है।

कोरोना के इस संकट की घड़ी में ऐसे समाचार विचलित करने वाले ही हैं। देश-दुनिया पहले ही एक महामारी से जूझ रही है जिसने पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है। उसे काबू करने के लिए सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बीच व्यवस्था में बेवजह परेशानी पैदा करना कहीं से भी उचित नहीं है। इस प्रकार की घटनाएं सरासर देश और समाज के खिलाफ हैं। धर्म के नाम पर हम इस प्रकार की घटनाओं में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं।

कोरोना की लड़ाई मानवता को बचाने की लड़ाई है जिसमें सभी को मानवता को सर्वोपरि रखते हुए इस लड़ाई में हिस्सा लेना है। फिर इस जंग में हिस्सा लेने का अर्थ केवल खुद को घरों से बाहर नहीं निकलने देना ही तो है। ऐसे में विरोध का क्या औचित्य? कोरोना जो नुकसान लोगों को पहुंचा रहा है उसके बीच ऐसी घटनाएं समाज को और ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।

अभी देश में तब्लीगी समाज का मामला सामने आया जहां तब्दलीगी जमात के चलते कोरोना के मामलों में एकाएक वृद्धि हो गई थी। इससे पहले संत समाज के एक संत ने रामनवमी पर लोगों से मंदिरों में जाने की बात कही थी। आखिर धर्म गुरुओं को समझना होगा कि इस वक्त दुनिया मानवता के खिलाफ ऐसी जंग लड़ रहा है जिससे पार पाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग ही अहम हथियार है। लिहाजा इस युद्ध में कोरोना के खिलाफ खड़े होते हुए लोगों से आग्रह करना होगा कि वह घरों पर रहें और जल्द से जल्द इस महामारी से पार पाएं।