ट्रंप का कदम
वैश्मिक महामारी कोरोना से इस वक्त पूरी दुनिया जूझ रही है, मगर अमेरिका में इसका असर अन्य देशों की तुलना में बहुत ज्यादा दिख रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 6 लाख लोग अमेरिका में कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 25 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच अमेरिका …
वैश्मिक महामारी कोरोना से इस वक्त पूरी दुनिया जूझ रही है, मगर अमेरिका में इसका असर अन्य देशों की तुलना में बहुत ज्यादा दिख रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 6 लाख लोग अमेरिका में कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 25 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंडिंग रोकने का ऐलान कर दिया है।
अमेरिका हर साल डब्लूएचओ को 400-500 मिलियन डॉलर (करीब 3 हजार करोड़ रुपए) फंड देता है। ऐसे वक्त में जब वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मार्च महीने में देशों से कोरोना से निपटने की तैयारियों के लिए फंड देने की अपील की थी, अब यह फंडिंग रोकना समझ से परे है।
फंडिंग रोकने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि कोरोना को लेकर डब्लूएचओ अपनी भूमिका निभाने में नाकाम रहा और चीन में जब यह वायरस फैला तो संयुक्त राष्ट्र ने उसे छिपाने का प्रयास किया। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो आज चीन से बाहर यह वायरस नहीं फैलता और इतने लोगों की जान न जाती। उन्होंने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र को जवाबदेह ठहराए जाने की बात भी कही है।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम के बाद विश्व स्तर पर कोरोना को लेकर राजनीति होने की बातें भी सामने आ रही हैं। अमेरिका में कोरोना के कहर के बीच अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए क्या उस पर पर्दा डालने के लिए ट्रंप ने यह कदम उठाया? क्या खुद का बचाव करने के लिए उन्होंने यह फंडिंग रोकी? इस बारे में भी सवाल उठ रहे हैं। अगर ऐसा है तो निश्चित तौर पर वैश्विक महामारी से लड़ाई में अमेरिका का यह कदम वर्तमान के साथ-साथ दीर्घकालिक रूप में भी गलत ही सिद्ध होगा।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेसस ने पहले ही कहा था कि कोविड-19 के मामले को अगर राजनीतिक रंग दिया जाता है तो इससे केवल मौत के आंकड़े ही बढ़ेंगे। सवाल यह है कि एक वैश्विक संस्था की फंडिंग रोकने से अमेरिका को क्या फायदा होगा। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति को विश्व स्वास्थ्य संगठन या संयुक्त राष्ट्र संघ से कोई शिकायत थी तो उन्हें इसका जवाब उचित तरीके से मांगना चाहिए था। स्वास्थ्य संगठन की फंडिंग रोकना तो एकतरफा कार्रवाई जैसा है।
चीन ने अगर इस बारे में कोई गलती की है तो ट्रंप डब्लूएचओ या संयुक्त राष्ट्र से इस बारे में जानकारी ले सकते थे कि कोरोना को लेकर चीन का रवैया क्या रहा था। यह भी एक पहलू है कि एक तरफ ट्रंप डब्लूएचओ को सामने रखकर चीन को अप्रत्यक्ष तौर पर दोषी ठहरा रहे हैं तो दूसरी ओर वह ट्विट कर चीनी राष्ट्रपति की कोरोना के खिलाफ लड़ाई में उसके कदम की सराहना भी कर रहे हैं। यह बात भी समझ से परे है।
