पाबंदी सही

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Edited By Amrit Vichar
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देश में चल रहे दूसरे चरण के लाकडाउन के दौरान 20 अप्रैल से सरकार ने कुछ क्षेत्रों में रियायत देते हुए सामान की खरीद पर ऑनलाइन छूट का ऐलान किया था। ई-कॉमर्स कंपनियों को लाकडाउन की परिधि से आंशिक तौर पर बाहर रखते हुए ऑनलाइन बिक्री की छूट थी। इस निर्णय को लेकर असमंजस की …

देश में चल रहे दूसरे चरण के लाकडाउन के दौरान 20 अप्रैल से सरकार ने कुछ क्षेत्रों में रियायत देते हुए सामान की खरीद पर ऑनलाइन छूट का ऐलान किया था। ई-कॉमर्स कंपनियों को लाकडाउन की परिधि से आंशिक तौर पर बाहर रखते हुए ऑनलाइन बिक्री की छूट थी। इस निर्णय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। आखिर लाकडाउन के ऐसे वक्त में जब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऑनलाइन शॉपिंग को कैसे सुरक्षित माना जा सकता है।

हाल ही दिल्ली में पिज्जा की डिलीवरी करने वाले डिलीवरी ब्वाय के संक्रमित पाया गया था। जाहिर है उसके संपर्क में अन्य परिवार या लोग भी आए होंगे। ऐसे में कैसे मान लिया जाए कि ऑनलाइन बिक्री से संक्रमण नहीं फैलेगा। इस बात पर गौर करते हुए केंद्र सरकार ने जब रविवार को जरूरी चीजों की बिक्री को छोड़ ई-कॉमर्स कंपनियों की ऑनलाइन खरीदारी पर रोक लगाने का ऐलान किया तो स्थिति स्पष्ट हुई। यह सही भी है कि ऐसे वक्त में लाकडाउन में जरा सी भी ढील नहीं दी जा सकती है, खासकर ऐसे मामलों में जब डिलीवरी के लिए घर-घर जाकर सामान पहुंचाया जाता है।

दरअसल सरकार के ऑनलाइन खरीदारी में छूट को लेकर सरकार की गाइड लाइन जारी होने के बाद से ही संशय बना हुआ था। लोगों की तरफ से इस मामले में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही थीं। ‘जान भी जहान भी’ की बात के साथ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था के प्रति भी चिंता जाहिर की थी तो लोगों को लगने लगा था कि 20 अप्रैल के बाद स्थिति में ढील दी जाएगी। मगर लाकडाउन-2 के बाद भी कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार नहीं बल्कि काफी वृद्धि हुई है।

दिल्ली में स्थिति इस कदर बिगड़ रही है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि 30 मई से पहले लाकडाउन में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती है। अर्थव्यवस्था का संकट अपनी जगह पर तो है ही मगर देश के लोगों की जान की चिंता पहले है, शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गैर-जरूरी वस्तुओं की ऑनलाइन रोक पर बैन बरकरार रखने का फैसला किया है।

सरकार पहले टीवी, फ्रिज, मोबाइल फोन जैसी वस्तुओं की ऑनलाइन बिक्री को लेकर तैयार थी, मगर अब ऐसा नहीं हो सकेगा। बड़े पैमाने पर ऑनलाइन बिक्री का मतलब होगा कोरोना संक्रमण फैलने के मामलों में भी वृद्धि की आशंका, लिहाजा सरकार के निर्णय को लेकर अब कोई संशय या नाराजगी नहीं होनी चाहिए। टीवी, फ्रिज, मोबाइल समेत तमाम ऐसी वस्तुएं हैं जिनके बगैर काम चल सकता है, मगर कोरोना का संक्रमण तीसरे दौर में प्रवेश कर गया तो फिर हालात काफी खराब हो जाएंगे, यह समझने की बात है।