जांच ही सहारा
कोरोना संक्रमण दूसरे चरण के लाकडाउन के दौरान भी अब तक संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़त ही हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुतािबक भारत में लाकडाउन का असर हुआ तो है मगर इसकी अवधि को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। यानी यह तय नहीं है कि 3 मई तक लाकडाउन की …
कोरोना संक्रमण दूसरे चरण के लाकडाउन के दौरान भी अब तक संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़त ही हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुतािबक भारत में लाकडाउन का असर हुआ तो है मगर इसकी अवधि को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। यानी यह तय नहीं है कि 3 मई तक लाकडाउन की इस अवधि के बाद संक्रमण के मामलों की सूरत क्या होगी।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात को कहा है कि कोरोना वायरस के मामले अब 7.5 दिन में दोगुने हो रहे हैं जबकि लाकडाउन से पहले 3.4 दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो रही थी। मगर हम केवल इस बात भर से आश्वस्त नहीं हो सकते कि मरीजों के दोगुना होने की रफ्तार कम हो गई है। चाहे जो भी हो नए मरीज लगातार बढ़ रहे हैं यह सच है। ऐसे में इस वक्त ज्यादा से ज्यादा लोगों का कोरोना संक्रमण जांच कराए जाने की सबसे ज्याद जरूरत है।
पेनल में जांच भी कराई जानी जरूरी है। पेनल का मतलब है कि इसमें एक से ज्यादा मरीजों के सैंपल को मिला दिया जाता है, उसकी कोरोना जांच होती है। अगर इसका परिणाम निगेटिव आया तो इसके मायने हुए कि सब मरीज निगेटिव हैं, पॉजिटिव आने की सूरत में फिर सभी मरीजों की अलग-अलग जांच होती है। चूंकि बड़ी मात्रा में अलग-अलग जांच संभव नहीं है, इसलिए पेनल जांच जरूरी है।
दू्सरी ओर कोरोना की रैपिड जांच में गुणवत्ता पर सवाल के बाद आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) ने इस जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। जाहिर है जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही की जगह नहीं है और जांच का परिणाम सटीक होना चाहिए। यहां कोरोना को लेकर जांच की बात इसलिए भी गंभीर हो जाती है कि कोरोना के ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिनमें कोरोना संक्रमण के शुरुआती कोई भी लक्षण नहीं हैं।
देश में अब तक ऐसे मामलों की संख्या 80 प्रतिशत है, यानी मरीज में कोई लक्षण नहीं हैं और वह कोरोना का वाहक बना हुआ है। जाहिर है, ज्यादा मात्रा में जांच से ही इसका उपाय संभव है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि लाकडाउन हटाना बीमारी का अंत नहीं बल्कि इसके अगले चरण की शुरुआत है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस ने भी जांच का दायरा बढ़ाने की बात को जोर देते हुए कहा है कि लाकडाउन प्रतिबंधों में ढील से पहले सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास कोविड-19 के हर मरीज का पता लगाने के बाद उनकी कोरोना जांच की पर्याप्त व्यवस्था हो। यह भी जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का भी पता लगाकर उनकी जांच कराई जाए। यानी कोरोना संक्रमण को रोकने का जांच ही कारगर तरीका है जिस पर सरकारों को अमल करना होगा।
