प्लाज्मा थेरेपी से उम्मीद
कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे और वैज्ञानिक उपायों की कोशिश के बीच वायरस को हराने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इस वायरस से बचाव के लिए टीका बनाने में भी दुनियाभर के अलग-अलग देशों में वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। करीब-करीब पूरा विश्व इस वक्त लाकडाउन के दौर से गुजर रहा है …
कोरोना संक्रमण के बढ़ते दायरे और वैज्ञानिक उपायों की कोशिश के बीच वायरस को हराने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इस वायरस से बचाव के लिए टीका बनाने में भी दुनियाभर के अलग-अलग देशों में वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। करीब-करीब पूरा विश्व इस वक्त लाकडाउन के दौर से गुजर रहा है और सामान्य जिंदगी ठप है।
बातें हो रही हैं कि सितंबर तक इस वायरस का टीका बनकर तैयार होगा। अगर ऐसा होता भी है तो इसके बाद भी पूरी दुनिया में इस टीकाकरण की प्रकिया में काफी वक्त लगेगा। लाकडाउन से भी आखिर कब तक कोरोना संक्रमण से बचाव हो सकेगा, यह भविष्य के गर्त में है।
मगर इन सबके बीच चिकित्सा विज्ञानियों ने प्लाज्माथेरेपी पर भी काम करना शुरू किया। भारत में भी इस पर काम हुआ और केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली में प्लाज्माथेरेपी की शुरुआत की गई। मंगलवार को दिल्ली के चार मरीजों पर प्लाज्माथेरेपी की गई और इन्हें संक्रमण के बाद ठीक हो चुके व्यक्ति की प्लाज्मा चढ़ाई गई।
अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि जिन चार मरीजों पर प्लाज्माथेरेपी की गई थी उनमें से दो मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और उन्हें जल्दी ही अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। बाकी दो मरीजों की सेहत में भी सुधार हो रहा है और उम्मीद की जा रही है कि वह भी जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे।
चूंकि खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री इस बात का खुलासा करने सामने आए हैं कि प्लाज्माथेरेपी से कोरोना के इलाज में सफलता हाथ लगी है तो इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि इस पर अभी और ट्रायल होगा और ट्रायल पूरा होने के बाद केंद्र सरकार से पूरी दिल्ली में गंभीर रूप से बीमार कोरोना संक्रमितों की प्लाज्माथेरेपी के िलए अनुमति मांगेंगे। प्लाज्माथेरेपी की दिशा में बढ़ाया गया यह कदम कोरोना मरीजों के लिए वरदान साबित हो, ऐसी कामना है।
हालांकि प्लाज्माथेरेपी के लिए अब भी तमाम प्रयोग हो रहे हैं, मगर यह शुरुआती नतीजे जरूर उत्साहित करने वाले हैं। इस थेरेपी को लेकर अब विश्व के तमाम चिकित्सा विज्ञानियों को मिलकर काम करना होगा ताकि इससे ज्यादा से ज्यादा कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों का इलाज िकया जा सके। कोरोना का टीका बनने तक अगर प्लाज्माथेरेपी से मरीजों को ठीक किया जा सकता है तो चिकित्सा जगत के लिए इससे बड़ी राहत की और कोई बात नहीं हो सकती है।
