अर्थतंत्र का सवाल
कोरोना महामारी के बाद देश में जारी लाकडाउन के बीच देश की अर्थव्यवस्था का काफी नुकसान हुआ है। उद्योग बंद हैं और विदेशी निवेश भी ठप है। ऐसे में जरूरी है कि लाकडाउन के साथ कोरोना से लड़ाई के बीच अर्थतंत्र के बारे में भी सकारात्मक पहल हो। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था बचाने को लेकर दो …
कोरोना महामारी के बाद देश में जारी लाकडाउन के बीच देश की अर्थव्यवस्था का काफी नुकसान हुआ है। उद्योग बंद हैं और विदेशी निवेश भी ठप है। ऐसे में जरूरी है कि लाकडाउन के साथ कोरोना से लड़ाई के बीच अर्थतंत्र के बारे में भी सकारात्मक पहल हो। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था बचाने को लेकर दो बार वित्तीय पैकेज का ऐलान भी कर चुकी है। अब सवाल यह है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उद्योगों को धीरे-धीरे रियायत देने के साथ ही ऐसा रोडमैप भी तैयार हो ताकि कोरोना बाद स्थिति सामान्य होने पर विदेशी निवेशक देश की तरफ आएं।
केंद्र सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए राज्यों के साथ विमर्श किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से कहा है कि वह ऐसे प्रस्ताव बनाएं जिससे राज्यों में किसी उद्योग को स्थापित करने को लेकर विदेशी निवेशक रुचि दिखाएं। उन्होंने कहा है कि इसके लिए नियम-कानून की सीमा में रहकर कोशिश यह होनी चाहिए कि आसानी से बाहर से आने वाले उद्योगों को तमाम अनापत्ति प्रणाण पत्र मिल सकें।
दरअसल इस वक्त चीन पूरी दुनिया के लिए कोरोना फैलाव के चलते विलेन की तरह बना हुआ है। अमेरिका और चीन के बीच तमाम मुद्दों पर तनातनी तो जारी है ही, अमेरिका ने उस पर भविष्य में कड़े प्रतिबंध लगाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। इससे पहले ही तमाम वैश्विक कंपनियां चीन से अपने उद्योग वापसी के लिए कदम उठा चुकी हैं। इसमें जापान जैसा बड़ा निवेशक देश भी शामिल है जिसने बड़े स्तर पर चीन में अपनी निर्माण इकाइयां स्थािपत की हुई हैं। जापान सरकार ने अपनी कंपनियों को स्वदेश वापसी के लिए बकायदा एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की ताकि कंपिनयों की स्वदेश वापसी में मदद की जा सके।
ऐसे में तमाम देशों की निगाहें उन कंपनियों की तरफ लगी हुई हैं, जो चीन से अपना काम समेट रही हैं। विदेशी निवेश पर अगर फोकस किया जाना है तो यह कंपनियां उसका बड़ा केंद्र बिंदु हो सकती हैं, शायद इसीलिए केंद्र सरकार ने बाहरी कंपनियों को स्थापित होने में मदद की पहल की है। निवेशकों को आसानी से जमीन उपलब्ध कराने से लेकर उन्हें राज्यों के स्तर पर हर तरह की मंजूरी दिलाना भी इसमें शािमल है। केंद्र सरकार के इस फैसले की गंभीरता को समझते हुए अब राज्यों की जिम्मेदारी है कि वह विदेशी निवेशकों को अपने राज्यों में किस तरह आकर्षित करती हैं।
