लाकडाउन के बाद
लाकडाउन-3 अब अपने आखिरी सप्ताह में प्रवेश करने वाला है। मार्च महीने में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बाद लाकडाउन ही एक मात्र उपाय रह गया था जिससे कोरोना महामारी के समुदाय संक्रमण को रोका जाता। लाकडाउन की इस अवधि में कोरोना संक्रमण रुका भी है, इस पर चिकित्सा विज्ञानी एकमत हैं। उनका …
लाकडाउन-3 अब अपने आखिरी सप्ताह में प्रवेश करने वाला है। मार्च महीने में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों के बाद लाकडाउन ही एक मात्र उपाय रह गया था जिससे कोरोना महामारी के समुदाय संक्रमण को रोका जाता। लाकडाउन की इस अवधि में कोरोना संक्रमण रुका भी है, इस पर चिकित्सा विज्ञानी एकमत हैं। उनका कहना है कि अगर लाकडाउन नहीं होता तो कोरोना संक्रमण की स्थिति भयावह होती और समुदाय संक्रमण को रोकने का लाकडाउन के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।
इधर लाकडाउन-3 की अवधि धीरे-धीरे कम हो रही है, दूसरी ओर चिकित्सा विज्ञानी इस बात से चिंतित हैं कि लाकडाउन-3 के बाद देश में इसके आगे नहीं बढ़ाने की स्थिति में क्या होगा। इस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बयान दिया है कि जून और जुलाई माह में देश में संक्रमण चरण पर पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि लाकडाउन का कितना असर हुआ है यह वक्त बीतने पर ही पता चलेगा।
मौजूदा डाटा और जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं, उनके हिसाब से यह संक्रमण तेज होने की बात उन्होंने कही है। डॉ. गुलेरिया की बात को समझा जाए तो साफ है कि लाकडाउन-3 के बाद भी इसे आगे जारी रखा जा सकता है। लाकडाउन की इस अवधि के बाद अगर चिकित्सक कहते हैं कि इसका असर भविष्य में देखने को मिलेगा तो इसका अर्थ साफ है कि संक्रमण केवल कुछ हद तक रोका जा सका है।
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक ट्रेडोस गेब्रेयसस ने चेताया है कि तमाम देश अपने यहां घोषित लाकडाउन को कम करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन देशों को चाहिए कि लाकडाउन से बाहर निकलने के उपाय बेहद सावधानीपूर्ण होने चाहिए। यदि देशों द्वारा संक्रमण का प्रबंधन बेहद सावधानी और चरणबद्ध तरीके से नहीं किया गया तो ऐसी स्थिति में लाकडाउन के बाद कोरोना संक्रमण का जोखिम वास्तविक रूप से बना रहेगा।
महानिदेशक की बात भी इसी तरफ इशारा करती है कि करीब डेढ़ माह के लाकडाउन के बाद भी यह नहीं कहा जा सकता है कि लाकडाउन समाप्त करने पर विचार हो। ऐसी स्थिति में सरकारों को चाहिए कि वह लाकडाउन हटाने या उसमें ढील देते वक्त तमाम सावधानियां बरतें ताकि जहां आपदा सामान्य है वहां यह भयावह रूप न ले ले। कोरोना संक्रमण में कोई भी असावधानी भविष्य में बड़ी तबाही कर सकती है, लिहाजा बचाव ही उपाय है।
