मौत पर सवाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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लाकडाउन-3 के दौरान भी विभिन्न राज्यों के मजदूर अपने घर लौट रहे हैं। उनके मूल स्थान पर रोजगार की कमी और लगातार लाकडाउन के कारण इनके पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। इधर मजदूरों की घर वापसी के दौरान तमाम स्थानों से उनके साथ हो रही दुर्घटनाओं की खबरें आ …

लाकडाउन-3 के दौरान भी विभिन्न राज्यों के मजदूर अपने घर लौट रहे हैं। उनके मूल स्थान पर रोजगार की कमी और लगातार लाकडाउन के कारण इनके पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। इधर मजदूरों की घर वापसी के दौरान तमाम स्थानों से उनके साथ हो रही दुर्घटनाओं की खबरें आ रही हैं जो कि विचलित करने वाली हैं। छोटी दुर्घटनाओं की खबरें तो आ ही रही थीं, मगर महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 16 मजदूरों की ट्रेन से कटकर हुई मौत का हादसा स्तब्ध करने वाला था।

इधर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की सीमा पर शनिवार देर रात मुंगवानी थाना क्षेत्र के पास ट्रक के अनियंत्रित होकर पलटने से उत्तर प्रदेश के छह मजदूरों की मौत के बाद रविवार को भी मुंबई से लौट रहे तीन मजदूरों की मध्य प्रदेश के बड़वानी में मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि इनकी मौत अत्यधिक गर्मी और थकान की वजह से हुई है। लाकडाउन के दौरान मजदूरों की इस तरह हो रही मौतें तंत्र पर सवाल खड़ा कर रही हैं।

जिन तीन मजदूरों की रविवार को बड़वानी में मौत हुई है अगर उनके जान जाने की वजह ज्यादा गर्मी है तो यह बात और भी परेशान करने वाली है क्योंकि अब गर्मी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में हादसे और बढ़ेंगे। तो इन मौतों को रोकने के लिए आखिर क्या उपाय किए जा रहे हैं। रेलवे ने एक मई से अब तक 350 श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया है। लाकडाउन के बीच 3.6 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को देश के विभिन्न राज्यों में स्थित उनके राज्य पहुंचाया गया है। जबकि मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियां, बसें चलाई जा रही हैं तो फिर क्यों ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं।

आखिर कैसे पैदल ही चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंच रहे मजदूरों को कहीं कोई मदद नहीं मिल रही है। जिन 16 मजदूरों की ट्रेन से कटने से मौत हुई वह आखिर पैदल ही क्यों जा रहे थे। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता है कि केंद्र या राज्यों की तरफ से उपाय नहीं किए जा रहे हैं, मगर सवाल यह है कि इन उपायों की जद में वह मजदूरों क्यों नहीं आ रहे हैं जो अब भी सिर पर गठरी रखकर, छोटे-छोटे बच्चों के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों पर दिख रहे हैं।

अगर मजदूर एक शहर से दूसरे शहर पहुंच रहा है तो उनसे कम से कम उनकी परेशानी के बारे में जानकर उन्हें मदद पहुंचाई जा सकती है। अब भी कई मजदूर पुलिस की डर से रेलवे ट्रैक या अनजान रास्तों पर सफर कर रहे हैं जो कि खतरनाक है। लिहाजा गृह मंत्रालय को ऐसे मजदूरों को यह भरोसा दिलाना होगा कि अगर वह कहीं सहायता मांगने जाते हैं तो उन्हें बेवजह परेशान न कर उचित सहायता दिलाई जाएगी। ऐसा हो तो उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में ऐसे हादसों की खबरें सुनने को न मिलें।