हॉटस्पॉट के मायने
राष्ट्रव्यापी लाकडाउन के उम्मीद से अधिक समय तक खिंच जाने की वजह से देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को सामान्य होने में काफी समय लगेगा। हालांकि केंद्र सरकार ने लाकडाउन हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। अनलॉक 1 सोमवार से शुरू होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शनिवार …
राष्ट्रव्यापी लाकडाउन के उम्मीद से अधिक समय तक खिंच जाने की वजह से देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को सामान्य होने में काफी समय लगेगा। हालांकि केंद्र सरकार ने लाकडाउन हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। अनलॉक 1 सोमवार से शुरू होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मॉल, होटल, रेस्तरां और पूजा स्थलों को अनलॉक के प्रथम चरण में फिर से खोलने की अनुमति 8 जून से होगी। केवल कन्टेनमेंट जोन में 30 जून तक लाकडाउन बढ़ाया गया है। लाकडाउन तो धीरे-धीरे हटेगा मगर हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों को परिभाषित करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास ही है।
इसके अलावा रेड, आरेंज या ग्रीन जोन की परिभाषा भी राज्य सरकारें ही तय करेंगी। कोरोना वायरस के साथ जीते हुए सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ऐसा कदम उठाया जाना जरूरी था ताकि जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़े। इस बीच लाकडाउन के दौरान कई स्थानों पर देखने में आया कि किसी क्षेत्र में कोरोना वायरस संक्रमण का मात्र एक मामला होने पर भी पूरे एक किमी के दायरे को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया जाता है। इससे उस क्षेत्र में जनजीवन पूरी तरह ठप हो जाता है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।
इसके स्थान पर होना यह चाहिए कि हॉटस्पॉट कोरोना संक्रमित व्यक्ति या अधिकतम उसके घर के दोनों तरफ के एक-एक पड़ोसी के घर तक ही सीमित हो। अगर किसी एक परिवार के लोग अपने घर में क्वारंटीन हैं तो फिर पूरी कॉलोनी और उसके एक किमी के दायरे में लोगों को घरों में रखने का कोई औचित्य नहीं है। देश में कोरोना का अब तक केवल स्थानीय प्रसार है न कि सामुदायिक प्रसार। सरकार को चाहिए कि वह हॉटस्पॉट जोन को फिर से परिभाषित करे। इस मुद्दे पर सरकारों को व्यावहारिक निर्णय लेने होंगे।
संक्रमित व्यक्ति और उसके परिवार के अन्य लोग समुदाय से दूर अपने घर में हैं तो फिर कोई वजह नहीं दिखती कि एक किमी के दायरे के लोगों को घरों में कैद रखा जाए। कई मामलों में जो व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया गया, उसके परिवार के अन्य सदस्यों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव मिलने के बावजूद उस पूरे इलाके को ही सील कर दिया गया। सरकार को कोरोना फैलाने वाले स्रोत के बारे में पता लगाकर उन्हें क्वारंटाइन करने की जरूरत है न कि किसी एक इलाके को केवल इसलिए 21 दिन तक सील करने, कि वहां कोई एक कोरोना केस मिला था। लिहाजा सरकार को लाकडाउन हटाने के चरणों के साथ ही इस व्यावहारिक पक्ष की तरफ ध्यान देने की जरूरत है ताकि लोग बेवजह परेशान न हों।
