हल्द्वानी: दुष्कर्म के आरोपी को अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा, गुस्साए परिजनों ने पीड़िता के घर पर किया पथराव, पुलिस ने नहीं दिया साथ
हल्द्वानी, अमृत विचार। मजदूर परिवार की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के करने वाले को अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई और सजा सुनते ही दुष्कर्मी के परिजन आग-बबूला हो गए। फैसले की शाम ही दुष्कर्मी के परिजन और गांव वालों ने गरीब परिवार के घर पर हमला कर दिया। पथराव किया और घर का …
हल्द्वानी, अमृत विचार। मजदूर परिवार की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के करने वाले को अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई और सजा सुनते ही दुष्कर्मी के परिजन आग-बबूला हो गए। फैसले की शाम ही दुष्कर्मी के परिजन और गांव वालों ने गरीब परिवार के घर पर हमला कर दिया। पथराव किया और घर का सामान तहस-नहस कर दिया। जान बचाकर भागे परिवार ने पूरी रात जंगल में गुजारी। मामले में पुलिस पर पीड़ित परिवार की मदद न करने का आरोप लगा है। ये मामला काठगोदाम थाना क्षेत्र का है।
कोतवाली पहुंचे पीड़ित परिवार ने बताया कि वर्ष 2019 में सातवीं में पढ़ने वाली उनकी बेटी खेड़ा गांव के मोहित पुत्र प्रकाश आर्या की पत्नी से ट्यूशन पढ़ती थी। एक रोज मोहित ने यह कहकर पीड़िता को घर बुलाया कि उसे मैडम बुला रही हैं। मोहित ने धोखे से बुलाकर नाबालिग से दुष्कर्म किया और इस मामले में शनिवार को अदालत ने मोहित को कसूरवार मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद शनिवार शाम परिवार और खेड़ा गांव के तमाम लोग आक्रोशित हो गए। शाम करीब सात बजे लोगों ने पीड़िता के घर पर हमला कर दिया। उस वक्त घर में कई छोटे बच्चे, बूढ़े मां-पिता, भाई-भाभी और बहन थे। पथराव के बीच परिवार किसी तरह जान बचाकर भाग निकला। इधर, आक्रोशित लोगों ने घर में तोड़-फोड़ कर दी। परिजनों का आरोप है कि लोगों ने घर में रखी कुछ नगदी और जेवर चोरी कर लिए। गांव वालों के डर से परिवार ने पूरी रात जंगल और झाड़ियों के बीच छिप कर गुजारी।
खेड़ा चौकी प्रभारी ने नहीं की परिवार की मदद
पीड़ित परिवार का कहना है कि घर के बाद उन्होंने डायल 112 पर कॉल की थी और फिर शिकायत लेकर खेड़ा चौकी प्रभारी मनोज कुमार के पास भी पहुंचे थे। खेड़ा चौकी प्रभारी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन्हें घर छोड़कर कहीं और रहने की सलाह दे दी। जिसके अगली सुबह न्याय के लिए वह कोतवाली पहुंचे, लेकिन यहां से भी मदद नहीं मिली।
घबराए बच्चों को पड़ोसियों ने दिया आसरा
परिवार के लोगों ने बताया कि उनके पास दो छोटे बच्चे हैं। घटना के बाद वह घर से भागे और झाड़ियों में छिप गए, लेकिन बच्चों को पूरी रात जंगल में बाहर रखना मुश्किल था। ऐसे में पड़ोस के परिवार ने घबराए बच्चों को आसरा दिया और सुबह परिजन उन्हें वहां से ले आए। उनका कहना है कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं है और न ही शनिवार रात से उन्होंने कुछ खाया है।
घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। मामले में दूसरे पक्ष का साफ शब्दों में समझा दिया गया था कि अगर पीड़िता के परिवार को किसी भी सूरत में परेशान किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। – प्रमोद पाठक, थानाध्यक्ष काठगोदाम
