इच्छा शक्ति और भरोसा

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Edited By Amrit Vichar
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अनलाक-1 के दूसरे दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की 125वीं सालाना बैठक को संबोधित करते हुए जब कहा कि ‘मुझे देश की क्षमता, टैलेंट और टेक्नोलॉजी पर भरोसा है, हमें विश्वास है कि हम एक बार फिर अर्थव्यवस्था को तेज़ रफ्तार देंगे, कोरोना ने हमारी स्पीड भले ही धीमी …

अनलाक-1 के दूसरे दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की 125वीं सालाना बैठक को संबोधित करते हुए जब कहा कि ‘मुझे देश की क्षमता, टैलेंट और टेक्नोलॉजी पर भरोसा है, हमें विश्वास है कि हम एक बार फिर अर्थव्यवस्था को तेज़ रफ्तार देंगे, कोरोना ने हमारी स्पीड भले ही धीमी की हो, लेकिन भारत लॉकडाउन को पीछे छोड़कर अनलॉक फेज़ में घुस चुका है’, तब यह उम्मीद जगना स्वाभाविक था कि कोरोना के दंश को देश पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना के खिलाफ और मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी। इशारा साफ है कि अब लाकडाउन में हुए नुकसान की भरपाई कोरोना से सावधान रहते हुए की जाएगी। इसमें कोई संशय नहीं है कि दो महीने के लाकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान पहुंचा है। ऐसे में उसे पटरी पर लाने के लिए उद्योगों का चलाया जाना जरूरी है और इसके लिए उद्योगपतियों को भरोसा दिलाना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इस बात को समझते हुए प्रधानमंत्री ने कारोबारियों को भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ खड़े हैं, कारोबारी दो कदम बढ़ाएंगे तो सरकार उनके समर्थन में चार कदम बढ़ाएगी।

स्वदेशी की बात करते हुए प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर भी था कि आत्मनिर्भर भारत में रोजगार पैदा करते हुए इस पर आगे बढ़ा जा सकता है। अब चूंकि सरकार ने पूरी तरह लाकडाउन से बाहर आने की घोषणा कर ही दी है तो ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि देश की आर्थिक स्थिति संभालने के साथ ही गरीब, मजदूर तबके के लिए जारी की गई योजनाएं अमल में लाई जा सकें।

उन योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करें। कोई दो राय नहीं कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए समय-समय पर आर्थिक पैकेज समेत छोटे उद्योगों के लिए भी कई घोषणाएं की हैं। सूक्ष्म एवं लघु मंत्रालय के तहत आने वाले उद्योगों की सरकार ने परिभाषा बदली है ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके।

अब कोरोनाकाल के बाद देश में नौकरशाही को आम जनता के हित में अपनी कार्यशैली में भी बदलाव करना होगा ताकि सरकार द्वारा की गई घोषणाएं सही वक्त और सही स्वरूप में आम जनता तक पहुंचें। सबको साथ मिलकर ही इस परेशानी से पार पाना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन पर जब देश को यह भरोसा दिलाया है कि सब कुछ जल्द ठीक होगा तो फिर उम्मीद है कि कोरोना को पराजित करते हुए देश की अर्थव्यवस्था जल्द पटरी पर हो।