कानपुर यूपीसीडा भर्ती घोटाला: फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे 12 आवेदकों को मिली नौकरी
कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008-2009 में की गई भर्तियों में पूरी तरह से मनमानी की गई। आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा रणवीर प्रसाद द्वारा मार्च 2017 में सौंपी गई जांच से खुलासा हुआ है कि नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले ही चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन होना चाहिए था, लेकिन …
कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008-2009 में की गई भर्तियों में पूरी तरह से मनमानी की गई। आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा रणवीर प्रसाद द्वारा मार्च 2017 में सौंपी गई जांच से खुलासा हुआ है कि नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले ही चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन होना चाहिए था, लेकिन नहीं कराया गया। परिणाम स्वरूप 12 आवेदनकर्ताओं के प्रमाण पत्र फर्जी होने के बाद भी उन्हें नौकरी मिली।
इनमें से चार ही बर्खास्त हुए। शेष अब भी नौकरी कर रहे हैं और वेतन उठा रहे हैं। उनके प्रमाण पत्र फर्जी हैं यह सभी को पता है, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि उनकी पहुंच सपा और भाजपा सरकार में भी रही। कार्रवाई न हो इसलिए अब विजिलेंस जांच का आदेश करा दिया गया। हालांकि विजिलेंस ने जांच तो शुरू कर दी है पर कोई खास प्रगति नहीं है।
2008 में हुई भर्ती की बात करें तो सहायक श्रेणी द्वितीय के पद पर परवेज आलम का चयन किया गया था। इस पद क लिए दो जुलाई जब साक्षात्कार हुआ तो 62 आवेदनकर्ता उपस्थित हुए, लेकिन साक्षात्कार के लिए जो अंकों की शीट बनाई गई उसमें 63 वें क्रमांक पर परवेज आलम का नाम जोड़ दिय गया। सहायक श्रेणी द्वितीय के पदों को भरने के लिए समूह ग की सीधी भर्ती प्रक्रिया नियमावली का पालन भी नहीं किया गया।
यहां तक की डीएम द्वारा नामित सदस्य भी चयन समिति में नहीं था। मानचित्रकार के पद पर आलोक कुमार पाल और हरदयाल कुशवाहा का चयन किया गया था। 16 जून 2008 को इसके लिए साक्षात्कार हुआ। अनुसूचित जाति के सदस्य के रूप में नामित उप प्रबंधक लेखा राजेंद्र प्रसाद और समिति अध्यक्ष एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक तपेंद्र प्रसाद उपस्थित नहीं थे। सिर्फ एक सदस्य ने ही साक्षात्कार ले लिया जो कि नियम विरुद्ध था।
मेरिट सूची में बदले अंक
आशुटंकक पद पर साक्षात्कार के अंक शीट में ओवरराइटिंग का मामला भी आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा रणवीर प्रसाद ने पकड़ा था। उन्हांने पाया कि 17 जुलाई 2008 को हुई समित की बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में केयू अंसारी उपस्थित नहीं थे। हरिश्चंद्र को साक्षात्कार के दौरान शीट पर 26 अंक दिए गए थे, लेकिन जब मेरिट बनी तो उसमें उनके अंक बढ़कर 30 हो गए। इसी पद के लिए सुषमा कुशवाहा, सुभाष चंद्र, राजकुमार पटेल का भी चयन हुआ। इनके चयन क लिए जो मेरिट सूची बनाई गई उसमें सदस्य के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।
