बरेली: नमूनों की जांच में दावों का निकला दम, नमक में आयोडीन कम
अनुपम सिंह, अमृत विचार। बरेली वासी सावधान…! यह खबर आपकी सेहत से सीधे जुड़ी है। कहीं आप कम आयोडीन की मात्रा वाले नमक का सेवन तो नहीं कर रहे हैं। अगर ऐसा कर रहे हैं तो जागरूक हो जाइए…। नहीं तो आपकी सेहत खतरे में पड़ सकती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ओर …
अनुपम सिंह, अमृत विचार। बरेली वासी सावधान…! यह खबर आपकी सेहत से सीधे जुड़ी है। कहीं आप कम आयोडीन की मात्रा वाले नमक का सेवन तो नहीं कर रहे हैं। अगर ऐसा कर रहे हैं तो जागरूक हो जाइए…। नहीं तो आपकी सेहत खतरे में पड़ सकती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ओर से की गई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नमक की जांच में आयोडीन की मात्रा कम पाई गई है, इससे शारीरिक और मानसिक विकास पर बड़ा असर पड़ सकता है।
नमक बेचने वाली कंपनियों के अलग-अलग दावे रहते हैं। नमक के पैकेट पर उसके सेवन करने से कौन-कौन से फायदे हैं, यह भी बताए गए हैं। कंपनियों के इन्हीं दावों को परखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की ओर से इस बार 25 से 31 अगस्त तक अभियान चलाया गया। शहर के अलावा आंवला, बहेड़ी तहसील क्षेत्रों में जाकर लोगों के घरों से खाद्य सामग्री लेकर उसकी मौके पर जांच की। उसकी रिपोर्ट में हर खाद्य सामग्री में गड़बड़ी पाई गई। इसी में नमक की भी जांच की गई, जिसमें आयोडीन की कमी पाई गई। यह चिंताजनक है। एक नहीं कई सैंपलों में आयोडीन की कमी मिली है।
30 पीपीएम होनी चाहिए आयोडीन की मात्रा
जानकारों की मानें तो हर खाद्य सामग्री की तरह नमक में आयोडीन की मात्रा तय की गई है। जांच करने वाली खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम में शामिल जानकार के मुताबिक, नमक में कम से कम आयोडीन की मात्रा 30 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) तक होनी चाहिए, लेकिन सैंपल के बाद जो रिपोर्ट आई है, उसमें 10 से 15 पीपीएम ही पाई गई है।
केमिकल युक्त हल्दी खा रहे लोग
फूड सेफ्टी ऑन व्हील (एफएसडब्ल्यू) से की गई जांच में हल्दी, मिर्च में भी गड़बड़ी पाई गई। जांच टीम की मानें तो हल्दी के सैंपल में तो केमिकल मिला होने की पुष्टि हुई है। हल्दी को और पीला करने के लिए केमिकल युक्त रंग का इस्तेमाल किया गया था। यह काफी खतरनाक है।
मिर्च, पनीर, दही, हींग बेसन तक में गड़बड़ी
टीम ने सात दिनों में दूध, बेसन, पनीर, घी, हींग, दाल, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, सरसों का तेल,नमक, मसाला, पानी, लाैंज, मिर्च, चावल, बर्फी, छेना, दही, सोयाबीन रिफाइंड, परवल, करेला, हरी मटर, आटा आदि की जांच की, जिसमें हल्दी पाउडर, पीली मिर्च, लाल मिर्च, बेसन, काली मिर्च, देशी घी, हींग,छेना, दही, पनीर, हल्दी खड़ी में गड़बड़ी पाई गई।
दुकान का नाम बताने को तैयार नहीं
एक अधिकारी के अनुसार, खाद्य सामग्री में गड़बड़ी पाए जाने के बाद संबंधित लोगों से काफी देर तक उस दुकान के बारे में जानकारी की गई, जहां से सामान की खरीदारी उन्होंने की थी, किसी ने भी दुकान का नाम नहीं बताया। सभी लोग गोलमोल जवाब देते रहे।
थालियों में पहुंचने तक गायब हो जा रही आयोडीन
आयोडीन नमक के रख-रखाव में दुकानदार नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। यही वजह है कि थालियों तक पहुंचने पर नमक में आयोडीन की मात्रा काफी कम हो जाती है। धूप में रखने से आयोडीन का क्षरण तेजी से हो जाता है। एक तरह से नमक से आयोडीन गायब हो जाती है।
नियमों की हो रही अनदेखी
सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम की भी जिले में अनदेखी की जा रही है। सामान्य दुकानदार आयोडीन नमक की स्टोरेज में रूचि नहीं दिखा रहे हैं तो वहीं जन वितरण प्रणाली के दुकानदार भी इसका पालन नहीं करते हैं। इसी वजह से नमक में आयोडीन की कमी पाई जा रही है।
आयोडीन की कमी से यह होती हैं दिक्कतें
- बच्चों, युवाओं, महिलाओं का शारीरिक, मानसिक विकास रुक जाता है
- गर्भवती महिलाओं को खतरा रहता है। गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बाधा आती है
- शरीर में कमजोरी आ जाती है
- गले में सूजन की समस्या खड़ी हो सकती है
- आयोडीन की कमी से वजन घट सकता है
- स्किन में दिक्कत हो सकती है
- आयोडीन की कमी से याददाश्त पर असर पड़ सकता है
- हार्ट रेट भी कम होने की संभावना रहती है
- बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है।
- घेंघा, बहरापन, गूंगापन अपंगता जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
फिजीशियन डॉ. बागीश वैश्य ने बताया कि आयोडीन की कमी से ग्योटर बीमारी हो जाती है। बच्चों, युवाओं, गर्भवती को बहुत समस्या हो सकती है। शारीरिक, मानसिक विकास रुक जाता है। एक व्यक्ति को उसके वजन के हिसाब से रोजाना 140 यूजी आयोडीन की आवश्यकता होती है, इससे कम सेवन पर शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय धर्मराज मिश्रा ने कहा कि सात दिन तक चलाए गए अभियान में घरों से खाद्य सामग्रियों की जांच गई। गड़बड़ियां मिली हैं। सभी को जागरूक किया गया है। जागरुकता लाने के लिए ऐसे अभियान चलाए जाते हैं।
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