रायबरेली: किसानो के लिए बाकुलाही ड्रेन बनी अभिशाप, हजारों एकड़ जमीन रहती है जलमग्न

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रायबरेली। जिले के दो विकास खंड रोहनिया और सलोन के किसानो के लिए बाकुलाही ड्रेन अभिशाप बन चुकी है। पूरे वर्ष में अधिकांश समय हजारों एकड़ जमीन जलमग्न रहती है। नतीजतन सीपेज की वजह से किसानों के खेत में वर्षों से खेती नहीं हो पा रही है। कारण ड्रेन की सफाई न होना है। जीविका …

रायबरेली। जिले के दो विकास खंड रोहनिया और सलोन के किसानो के लिए बाकुलाही ड्रेन अभिशाप बन चुकी है। पूरे वर्ष में अधिकांश समय हजारों एकड़ जमीन जलमग्न रहती है। नतीजतन सीपेज की वजह से किसानों के खेत में वर्षों से खेती नहीं हो पा रही है। कारण ड्रेन की सफाई न होना है। जीविका के लिए किसान पलायन को विवश हैं।
सलोन विकास खंड से शुरू होकर यह झील रोहनिया ब्लाक के मध्य से होते हुए प्रतापगढ़ जिले में प्रवेश करती है।

इस झील की सफाई न होने के कारण दोनों विकास खंडो के हजारों किसानो की जीविका पर संकट बना हुआ है। किसानो को अपने बुजुर्गो से पुश्तैनी जमीन तो मिली है, जमीन के मालिक भी किसान है, लेकिन यह जमीन किसानो की भूख नहीं मिटा पाती है। क्षेत्र की हजारों एकड़ भूमि पूरे साल सीपेज का शिकार बनी रहती है। इसके कुछ हिस्से में मात्र धान की फसल होती है।

यदि कभी अच्छी बरसात हो जाती है तो धान की फसल भी पानी मे डूबकर सड़ जाती है। रोहनिया ब्लॉक के गाँव रायपुर, तामस गढ़, सुमेर बाग, उमरन, अड्डा, गंगेहरा गुलालगंज, मिश्र पुर सहित करीब दो दर्जन ऐसे गांव हैं जो तीन तरफ से सीपेज का शिकार हैं। इन गांवो में एक तरफ शारदा सहायक नहर है तो दूसरी ओर एनटीपीसी का ऐस पाण्ड। तीसरीओर बकुलाही झील का विकराल रूप गांवो को टापू बना देता है।

सफाई के लिए 20 साल पहले मिला था बजट

रोहनिया विकास खंड के किसानो की भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर प्रयास शुरू हुए थे। उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम द्वारा पूरे क्षेत्र में सर्वेक्षण का कार्य शुरू हुआ। तब शासन ने बकुलाही झील की सफाई और जलनिकासी के लिए नौ करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसके लिए सांसद सोनिया गांधी द्वारा एक कार्य योजना भी तैयार कराई गयी थी। धन का आवंटन उत्तर प्रदेश जल निगम को किया गया था, लेकिन झील की सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया और मामला ठंडे बस्ते मे चला गया।

पक्षी विहार प्रशासन ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती

शासन द्वारा बकुलाही झील की सफाई की पहल की गयी थी, तब क्षेत्र के समसपुर के पास स्थित पक्षी विहार प्रशासन ने इस पर आपत्ति की थी। इसके लिए पक्षी विहार की ओर से उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी।

जिसमे कहा गया था कि यदि सफाई की गयी तो समसपुर झील में पानी कम हो जाएगा और प्रवासी पक्षियों के लिए वातावरण अनुकूल नहीं होगा। पक्षी विहार के आस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा। उसके बाद उच्च न्यायालय ने झील की सफाई पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था। उसी के बाद बकुलाही झील की सफाई का काम रोक दिया गया था।

कहां खर्च हुई तीन करोड़ की बड़ी धनराशि ?

उत्तर प्रदेश जलनिगम को बकुलाही झील की सफाई के लिए शासन द्वारा आवंटित हुए नौ करोड़ रुपये में से तीन करोड़ रुपये खर्च भी गए, लेकिन धरातल पर कहीं भी काम नहीं हुआ। कोई भी नहीं बता पा रहा यह पैसा कहां गया। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 मे इस धनराशि में से तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह धनराशि किस संस्था को आवंटित की गयी और धन को कहां व्यय किया गया, यह कोई बता नहीं पा रहा है। इस बारे मे कई जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जवाब भी मांगा, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

रोहनिया ब्लाक के पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीराम पाल ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिला योजना समिति में भी उनके द्वारा इस मामले को कई बार उठाया गया था, लेकिन जिम्मेदार विभाग कोई उत्तर नहीं दे पा रहे है।

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