खर्च पर नियंत्रण
कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था के नकारात्मक प्रभाव अब नजर आने लगे हैं। केंद्र सरकार के खजाने में आय-व्यय का असंतुलन हो रहा है। राजस्व में लगातार कमी आ रही है, इसके विपरीत खर्च अपनी जगह पर कायम हैं। खर्चों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने अब कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी …
कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था के नकारात्मक प्रभाव अब नजर आने लगे हैं। केंद्र सरकार के खजाने में आय-व्यय का असंतुलन हो रहा है। राजस्व में लगातार कमी आ रही है, इसके विपरीत खर्च अपनी जगह पर कायम हैं। खर्चों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने अब कदम उठाना शुरू कर दिए हैं।
इसी कड़ी में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने किसी भी मंत्रालय के अधीन अब तक की गई नई घोषणाओं के लागू होने में मार्च 2021 तक रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय ने जिन योजनाओं को सैद्धांतिक रूप से वित्तीय स्वीकृति दे दी है, उन योजनाओं पर भी रोक रहेगी। स्वीकृत और मूल्यांकन की श्रेणी में मौजूद योजनाओं पर भी रोक रहेगी।
दरअसल लाकडाउन के बाद सरकार के राजस्व में कमी को लेकर लेखा महानियंत्रक ने रिपोर्ट जारी कर कहा था कि अप्रैल 2020 के दौरान सरकार को 27,548 करोड़ रुपये राजस्व मिला। यह बजट अनुमान का 1.2 प्रतिशत था, जबकि सरकार ने 3.07 लाख करोड़ खर्च किया, जो बजट अनुमान का 10 फीसदी था। यानी खर्च और आय में करीब 2.7 लाख करोड़ का अंतर था।
जाहिर है राजस्व सरकार के निर्णयों से ही बढ़ेगा, मगर फिलहाल राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार आम जनता पर तो कोई बोझ डालेगी नहीं, लिहाजा वह उन खर्चों पर ही कटौती करना चाहेगी जो उसकी प्रतीक्षारत योजनाओं पर होना है। इसीलिए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाओं को छोड़कर सरकार ने 500 करोड़ रुपये से ऊपर की योजनाओं सहित वित्तीय वर्ष 2020-21 में पहले से ही स्वीकृत या अनुमोदित नई योजनाओं को शुरू करने में एक वर्ष तक रोक लगाने का फैसला किया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही 3.8 फीसदी राजकोषीय घाटे में है। कोरोना लाकडाउन के बाद उत्पन्न आर्थिक स्थितियों के बीच सरकार की सबसे बड़ी चुनौती राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने की है। इस राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए जाहिर है केंद्र सरकार और भी निर्णय लेगी ताकि आय और व्यय में नियंत्रण बना रहे।
ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इस घाटे की भरपाई की जाए और ऐसा करने के लिए ही केंद्र सरकार ने नई योजनाओं के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, जो कि मौके की नजाकत को देखते हुए ही किया गया है। चूंकि देश में आर्थिक गतिविधियां अभी पूरी तरह से शुरू होने में वक्त लगना है, लिहाजा अभी सरकार के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं।
