शिक्षक भर्ती में राजनीति
उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती मामले में विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गत 3 जून को प्रदेश में 69000 बेसिक शिक्षकों की भर्ती संबंधी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर की अदालत का कहना था कि परीक्षा के दौरान पूछे गए कुछ प्रश्न गलत …
उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती मामले में विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गत 3 जून को प्रदेश में 69000 बेसिक शिक्षकों की भर्ती संबंधी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर की अदालत का कहना था कि परीक्षा के दौरान पूछे गए कुछ प्रश्न गलत थे। इसलिए केंद्रीय अनुदान आयोग को इसकी फिर से जांच पड़ताल करनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने एक विशेष याचिका दाखिल कर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया रोके जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की रोक के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंप दी तो विपक्ष ने इस मामले में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उतर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश चन्द्र द्विवेदी कहते हैं कि 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में प्रयागराज के एक परीक्षा केंद्र में गड़बड़ी का मामला सामना आते ही सरकार ने इसकी जांच एसटीएफ को सौंप दी। इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि निर्धारित कट ऑफ अंक के खिलाफ कुछ लोगों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा मित्रों की मांग पर 37339 पदों को रोक कर शेष पर भर्ती का अंतरिम आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले से पहले बेसिक शिक्षा विभाग का पक्ष नहीं सुना। इसलिए राज्य सरकार इस आदेश को संशोधित कराने के लिए अपील दायर करेगी। एसटीएफ की जांच से ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।
इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मामले की तुलना मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापाम घोटाले से की । बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। हालांकि इस मामले में गड़बड़ी के तथ्य सामान्य नहीं हैं।
आरोप है कि डायरियों में छात्रों के नाम, पैसे का लेनदेन, परीक्षा केंद्रों में बड़ी हेरफेर, इन गड़बड़ियों में रैकेट का शामिल होना ये सब दर्शाता है कि इसके तार काफी गहरे जुड़े हैं। इन गड़बड़ियों के पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। इन सब सवालों के जवाब एसटीएफ को भी तलाशने होंगे। सरकार को युवाओं की आवाज को भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग के रूप में देखना चाहिए। युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
