आपदा और राहत
देश में लगातार कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लाकडाउन में ढील के साथ ही अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने के संकेत मिलने लगे हैं। लाकडाउन में छूट दिए जाने से अप्रैल महीने के मुकाबले मई में देश में तेल की मांग करीब 50 फीसदी बढ़ी है। तेल की खपत बढ़ने का यह आंकड़ा …
देश में लगातार कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लाकडाउन में ढील के साथ ही अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने के संकेत मिलने लगे हैं। लाकडाउन में छूट दिए जाने से अप्रैल महीने के मुकाबले मई में देश में तेल की मांग करीब 50 फीसदी बढ़ी है। तेल की खपत बढ़ने का यह आंकड़ा तेल मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है। तेल की मांग बढ़ने का सीधा का मतलब है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है।
कोरोना काल में देश ने दो महीने का लाकडाउन देखा है, इधर जून माह से सरकार ने लाकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलने का निर्णय लिया है। चूंकि अब लाकडाउन में लगातार छूट मिलने जा रही है, इससे साफ है कि अर्थव्यवस्था और सुधरेगी। कोरोना के लगातार प्रसार के साथ ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। जिस तरह से लाकडाउन में ढील के साथ ही देश में कोरोना संक्रमण के मामले एकाएक बढ़ने लगे उससे चिंता तो साफ है ही।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक देश में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 9985 मामले सामने आए जिससे संक्रमितों की संख्या पौने 3 लाख से अधिक हो गई तथा 279 लोगों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 7745 तक पहुंच गया। अब एक तरफ महामारी का संकट है तो काफी समय से बंद पड़ी आर्थिक गतिविधियां खोलना भी सरकार के लिए जरूरी है।
आर्थिकी के लिहाज से दो महीने से ज्यादा लंबा लाकडाउन ठीक नहीं है। यहीं से सरकार को एक ऐसी नीति बनानी होगी जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ ही कोरोना संक्रमण के मामले भी रुकें। हालांकि एक राहत की खबर यह भी है कि कोरोना के चलते अब मौत का प्रतिशत कम हो रहा है।
इधर तेल मंत्रालय द्वारा जारी आकड़ों से अर्थवस्था के उत्साहित करने वाली खबर आती है तो स्वास्थ्य मंत्रालय से हर रोज कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की जानकारी आ रही है। अब चूंकि लाकडाउन को चरणबद्ध ढंग से हटाने पर काम शुरू हो चुका है, लिहाजा साफ है कि सरकार चाहती है कि देश में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़े।
मगर ऐसा तभी संभव है जब लोग सुरक्षात्मक उपायों का कड़ाई से पालन करते हुए खुद की रक्षा करें। आपदा नियंत्रण के साथ ही अर्थव्यवस्था पटरी पर आती है तो ही माना जाएगा कि हम कोरोना से जंग जीतने की ओर हैं। मगर ऐसा होना अभी बहुत दूर की बात दिखती है, क्योंकि कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आफत अभी और बढ़ेगी। अब देशवासियों को कोरोना के खिलाफ जंग लड़ते हुए हर तरह खुद को सुरक्षित रख आगे बढ़ना होगा।
