भरोसे की बात

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Edited By Amrit Vichar
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पिछले कई दिनों से लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना से विवाद के बाद इस मुद्दे को लेकर अब अपनी सैन्य शक्ति का हवाला देते हुए रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन को कड़े शब्दों में चेताया है। उनका कहना है कि भारत सैन्य शक्ति के मामले में अब कहीं से भी कमजोर नहीं …

पिछले कई दिनों से लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना से विवाद के बाद इस मुद्दे को लेकर अब अपनी सैन्य शक्ति का हवाला देते हुए रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन को कड़े शब्दों में चेताया है। उनका कहना है कि भारत सैन्य शक्ति के मामले में अब कहीं से भी कमजोर नहीं है। साथ उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर वार्ता जारी है, देश और संसद को इस बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी।

जाहिर है केंद्र सरकार को इस बारे में सारी सच्चाई संसद के सामने रखनी होगी, भले ही इसमें कुछ समय लग जाए। देश की सीमाओं पर किसी भी गतिविधि और देश की जमीन के एक-एक इंच का हिसाब जानने का देशवासियों को हक है। लिहाजा यह मुद्दा अब काफी संवेदनशील हो चुका है।

दरअसल पिछले कुछ दिनों से विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ इस बात को लेकर हमलावर है कि लद्दाख क्षेत्र में चीन ने हमारे बड़े भू-भाग पर कब्जा किया है। इस मुद्दे को तब और हवा मिली जब भारतीय सेना के रिटायर्ज लेफ्टिनेंट जनरल ने भारत के 40 से 60 स्कवायर किमी जमीन पर चीनी घुसपैठ का दावा किया था। उनका कहना था कि चूंकि भारत का एक बड़ा हिस्सा चीन के कब्जे में है, लिहाजा कूटनीतिक स्तर पर वह भारत के साथ किसी भी स्तर की बातचीत में अपनी ओर से कड़ी शर्तें रख सकता है, जिसमें उसके कब्जे वाले इलाके में निर्माण भी शामिल है।

अब दिक्कत यह है कि भारत अगर इससे इनकार करता है तो चीन भारत के खिलाफ सीमित युद्ध छेड़ सकता है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के इस दावे के बाद विपक्षी पार्टियों को सरकार के खिलाफ और आक्रामक होने का मौका मिला। शायद यही वजह है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को खुद इस मामले में आगे आना पड़ा।

जम्मू-कश्मीर के लिए हुई वर्चुअल रैली में उन्होंने कहा कि भारत किसी भी कीमत पर इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा। यह बात सर्वविदत है कि चीन की चाल हमेशा भारत की जमीन हड़पने की रही है। वह थोड़े-थोड़े हिस्से में कब्जा कर आगे बढ़ने की उसकी कोशिश रहती है। लिहाजा भारत को उसकी किसी भी चाल का उचित जवाब देना चाहिए।

केंद्र सरकार की कोशिश यह होनी चाहिए कि वह चीन को कड़ा संदेश दे कि भारत की जमीन पर कब्जे की उसकी नीयत को वह समझता है, और ऐसा किसी भी सूरत में नहीं होने देगा। भले ही इसका उपाय फिर चीन द्वारा छेड़े जाने वाले सीमित युद्ध का उसी की भाषा में जवाब क्यों न हो। बहरहाल रक्षा मंत्री के आज के बयान के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले की पूरी सच्चाई जल्द से जल्द देश के सामने आए।