संयम और धैर्य
भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प और भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद सोशल मीडिया में जिस तरह का माहौल दिख रहा है, वह एक तरह से युद्धोन्माद को बढ़ाने जैसा नजर आ रहा है। देश की मीडिया में भी इस घटना के बाद सेना, रक्षा मंत्रालय, प्रधानमंत्री की मीटिंग समेत तमाम मुद्दों …
भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प और भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद सोशल मीडिया में जिस तरह का माहौल दिख रहा है, वह एक तरह से युद्धोन्माद को बढ़ाने जैसा नजर आ रहा है। देश की मीडिया में भी इस घटना के बाद सेना, रक्षा मंत्रालय, प्रधानमंत्री की मीटिंग समेत तमाम मुद्दों पर पल-पल की रिपोर्टिंग की जा रही है, वह भी एक तरह से इस मामले में सही भूमिका नहीं कही जा सकती है।
देश का खुफिया तंत्र, सेना की कार्रवाई, सुरक्षा मुद्दों से संबंधित मुद्दों को लेकर हमेशा ही सावधानी बरते जाने की जरूरत है, और ऐसे समय में जब स्थिति संवेदनशील हो, सोशल मीडिया समेत सभी प्रकार के मीडिया संस्थानों को और अधिक जिम्मेदारी से आगे बढ़ने की जरूरत है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर मीडिया की भूमिका हमेशा संवेदनशील रही है, यह बात समझनी होगी।
पाकिस्तानी आतंकवादियों ने जब मुंबई हमले को अंजाम दिया था, वहां होटल के कमरों में टीवी पर चल रहे लाइव प्रसारण को देखते हुए आतंकवादी अपना कदम बढ़ा रहे थे। चूंकि बाहर उन्हें कुछ पता नहीं था मगर टीवी चैनलों पर हो रही लाइव रिपोर्टिंग से उन्हें यह मालूम चल रहा था कि कितनी सेना पहुंच चुकी है, पैरा-कमांडो की पोजिशन क्या है। इसी से वह पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स से दिशा-निर्देश ले रहे थे। बाद में सरकार की ओर से जब दिशा-निर्देश जारी हुए तब लाइव रिपोर्टिंग बंद हुई।
यह भी बता दें कि पिछली 6 जून को जब चीन और भारत की सेना के बीच उच्च स्तरीय बातचीत होनी थी, तब सेना की ओर से यह बयान जारी किया जा चुका था कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक चल रही है, मीडिया इस बैठक को लेकर पूर्वानुमानों पर आधारित कोई भी रिपोर्ट न दिखाए। देश के नागरिकों को भी इस मुद्दे पर धैर्य बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि सरकार और सेना के स्तर से ही इसमें उचित कार्रवाई होगी।
इस भावनात्मक मुद्दे पर देश सेना के साथ है, हमें हमारी सैन्य क्षमता के साथ ही वैश्विक कूटनीति पर भी पूरा भरोसा है कि विश्व मंच पर यह साबित किया जा सके कि चीन ने हमेशा भारत के साथ छल किया है। दूसरी ओर चीन की मीडिया की बात करें तो वहां के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस बात का जिक्र तो िकया है कि चीन के सैनिक हताहत हुए हैं, मगर उनकी संख्या तक देने से गुरेज किया है। इससे साफ पता चलता है कि चीन की मीडिया का इस मामले में क्या रवैया है। केंद्र सरकार की स्तर से इस मामले का हल निकलेगा और देशवासी सेना, सरकार के साथ हैं।
