बरेली: 130 साल का सफर…पर्यटन को बढ़ावा देगी मीटरगेज ट्रेन

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बरेली, अमृत विचार। पूर्वोत्तर रेलवे लगभग मीटर गेज से ब्राड गेज में तब्दील हो चुका है। करीब 90 प्रतिशत रेलवे लाइनें ब्राडगेज हो चुकी हैं। मैलानी-नानपारा रेल खंड पर अब भी मीटरगेज ट्रेनें दौड़ रहीं हैं। कई बार इस रेल खंड के अमान परिवर्तन का मुद्दा उठा। दुधवा नेशनल पार्क भी इस रास्ते में आने …

बरेली, अमृत विचार। पूर्वोत्तर रेलवे लगभग मीटर गेज से ब्राड गेज में तब्दील हो चुका है। करीब 90 प्रतिशत रेलवे लाइनें ब्राडगेज हो चुकी हैं। मैलानी-नानपारा रेल खंड पर अब भी मीटरगेज ट्रेनें दौड़ रहीं हैं। कई बार इस रेल खंड के अमान परिवर्तन का मुद्दा उठा। दुधवा नेशनल पार्क भी इस रास्ते में आने के कारण अमान परिवर्तन को लेकर भी कई रोड़े आए, मगर अब पूर्वोत्तर रेलवे 170 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड का इस्तेमाल ऐतिहासिक धरोहर की तरह करेगा। पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि फैसला लिया गया है कि मीटर गेज की यह लाइन ब्राड गेज में तब्दील नहीं होगी। ताकि आने वाली पीढ़ियां ब्रिटिश कालीन मीटर गेज रेल लाइन का अनुभव कर सकें।

मैलानी नानपारा रेल खंड को एक जनवरी 1892 में शुरू किया गया था। इस रेलखंड को उस जमाने में एक व्यस्त रेल मार्ग माना जाता था। एक के बाद एक मालगाड़ी, सवारी गाड़ी का संचालन बढ़ने से इसका महत्व और भी ज्यादा हो गया। चूंकि यह रेल खंड दुधवा नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, इसलिए बीते सालों वन्य जीवों की सुरक्षा के मद्देनजर हाईकोर्ट ने इसे बंद करने के आदेश दिए थे। मौजूदा समय पर 05356-55 व 05362-61 अप व डाउन पैसेंजर ट्रेनों का संचालन किया जाता है।

मैलानी से नानपारा तक नहीं किया जाएगा अमान परिवर्तन
मैलानी से नानपारा के बीच करीब 16 स्टेशन पड़ते हैं। सभी स्टेशनों का अपने आप में स्थानीय महत्व है। ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सहेजने से पर्यटन के लिहाज से भी इस क्षेत्र का विकास होगा। इधर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे पंकज कुमार सिंह ने बताया कि मैलानी से नानपारा तक 170 किलोमीटर तक लंबा रेलखंड है। जिसका अमान परिवर्तन नहीं किया जाएगा। यह रेलखंड मीटरगेज ही रहेगा।

जंगल की सैर कराती है टूरिस्ट ट्रेन
दार्जलिंग, शिमला जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में जिस प्रकार से नैरो गेज की टॉय ट्रेनों को सहेजा गया है बिल्कुल उसी तर्ज पर मैलानी-नानपारा रेल खंड को भी विकसित करने की रेलवे की योजना है। किसी जमाने में जिस मीटरगेज ट्रेनों को लोग उनकी रफ्तार के कारण बैलगाड़ी कहा करते थे, अब यही मीटरगेज ट्रेनें पर्यटन को बढ़ावा देने के काम आएंगी। बीते दिनों इस रेल खंड के बीच पड़ने वाले मैलानी-बिछिया मार्ग पर टूरिस्ट कोचों के साथ ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था। जो यात्रियों को जंगल की सैर कराती है।

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