अयोध्या: ड्यूटी की फिर भी फंसा 21 कर्मियों का वेतन, यूपीएसआरटीसी का है मामला
अयोध्या, अमृत विचार। काम नहीं, तो दाम नहीं यह कहावत तो सबने सुनी होगी, लेकिन रोडवेज महकमे में इसका उल्टा हुआ है। कर्मियों ने पूरे माह ड्यूटी की, लेकिन मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारियों के फरमान में फंस गए। कुल 21 कर्मियों का अगस्त माह का वेतन रुक गया है। 10 दिन से पीड़ित कर्मी इस …
अयोध्या, अमृत विचार। काम नहीं, तो दाम नहीं यह कहावत तो सबने सुनी होगी, लेकिन रोडवेज महकमे में इसका उल्टा हुआ है। कर्मियों ने पूरे माह ड्यूटी की, लेकिन मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारियों के फरमान में फंस गए। कुल 21 कर्मियों का अगस्त माह का वेतन रुक गया है। 10 दिन से पीड़ित कर्मी इस अधिकारी से उस अधिकारी के यहां चक्कर लगा रहे हैं। कार्रवाई के दायरे में आए कर्मियों में 5 महिलाएं हैं, जिनमें तीन की आयु 50 से ऊपर है।
नियमित भर्तियां न होने से रोडवेज महकमा कर्मचारियों की कमी से दो-चार है। विभागीय अधिकारियों ने नियमित कामकाज निपटाने के लिए चालक और परिचालक पद पर तैनात 21 कर्मचारियों की ड्यूटी विभिन्न लिपकीय व अन्य पटल पर लगा दी। इसके लिए बकायदा सक्षम अधिकारी की ओर से आदेश भी निर्गत किया गया। आदेश जारी कर किसी की ड्यूटी आवंटन पटल पर लगाई गई तो किसी की रिलीवर के रूप में, तो किसी को अन्य पटल पर तैनात किया गया। ड्यूटी पर लगाए गए महिला और पुरुष कर्मचारियों ने पूरे माह ड्यूटी की। माह बीतने के बाद मुख्यालय ने कार्य की समीक्षा की तो अपने मूल कार्य से अतिरिक्त कार्य में लगाए गए ऐसे सभी 21 कर्मियों का अगस्त माह का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया।
दरअसल विभागीय नियम कायदा के मुताबिक नियमित तथा संविदा चालक परिचालक को एक माह में न्यूनतम 4 हजार किलोमीटर की ड्यूटी करनी होती है। डिपो और परिक्षेत्र स्तर से जो ड्यूटी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई थी उसमें इन सभी के किलोमीटर जीरो थे। जिसके चलते मुख्यालय की ओर से अगस्त माह का वेतन रोकने का आदेश निर्गत हो गया।
अक्षम और 50 से ज्यादा उम्र के लोग है छूट के दायरे में
रोडवेज महकमे में चालक और परिचालक पद पर तैनात ऐसे कर्मियों को ड्यूटी से छूट दी गई है जो शारीरिक रूप से अक्षम है अथवा जिनकी उम्र 50 वर्ष से ज्यादा हो गई है। इस बाबत परिवहन मुख्यालय की ओर से आदेश-निर्देश भी निर्गत किया गया है। हालांकि मुख्यालय की ताजा कार्रवाई की चपेट में आई 5 महिला परिचालकों में हाजरा बानो व शाजिया खातून को छोड़ संध्या सिंह, शशिलता तिवारी व पूर्णिमा विद्यार्थी की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है और तीनों इस छूट के दायरे में आती है। छूट के दायरे में होने के चलते इन तीनों महिलाओं का वेतन नहीं रुकना चाहिए था। कार्रवाई के दायरे में आये कर्मियों आलोक व अशोक कुमार का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों के आदेश पर पूरे महीने ड्यूटी की। अब वेतन के लिए इधर उधर चक्कर लगाना पड़ रहा है। वही महिला परिचालक शशिलता तिवारी व पूर्णिमा का कहना है कि उन्होंने आवंटित कार्य के अतिरिक्त ड्यूटी अधिकारी के आदेश पर की। वैसे भी मुख्यालय से परिचालक की ड्यूटी न करने की छूट मिली है। बावजूद इसके वेतन आहरण पर रोक लगा दिया गया।
क्षेत्रीय रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के मंत्री राजेंद्र पांडे का था धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि प्रकरण अधिकारियों और मुख्यालय के संज्ञान में लाया गया है। जल्द से जल्द रुका हुआ वेतन निर्गत करने की मांग की गई है।
डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार ने बताया कि रोडवेज मुख्यालय ने जीरो किलोमीटर में 21 चालकों-परिचालकों का अगस्त माह का वेतन रोका है। मुख्यालय से पत्राचार और बातचीत चल रही है जल्द ही सभी का वेतन निर्गत करने का आदेश हो जाएगा।
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