नेपाल के बहाने
पड़ोसी देश नेपाल में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी घटित हो रहा है उससे हमें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। नेपाल में काबिज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने जबसे भारत के विरोध के बावजूद नेपाल का नया नक्शा जारी किया है, तबसे दोनों देशों के बीच गतिरोध है। मगर नेपाल के प्रधानमंत्री …
पड़ोसी देश नेपाल में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी घटित हो रहा है उससे हमें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। नेपाल में काबिज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने जबसे भारत के विरोध के बावजूद नेपाल का नया नक्शा जारी किया है, तबसे दोनों देशों के बीच गतिरोध है। मगर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का अब देश के भीतर विपक्षी पार्टियों ने विरोध शुरू कर दिया है।
विपक्षियों ने साफ कह दिया है कि उन्हें कुर्सी छोड़नी होगी। यह तो नेपाल की अंदरूनी राजनीति है, मगर इस बीच देखने को मिला है कि नेपाल के भारत के साथ गतिरोध के बीच अचानक नेपाल के साथ संबंध बढ़ाने को पाकिस्तान काफी अधीर हो गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात करने के लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने समय मांगा है। दूसरी तरफ पहले ही नेपाल में अपनी सक्रियता बढ़ा चुका चीन अब नेपाल में कोरोना वायरस बचाव के बहाने कर्मचारियों के रूप में अपनी खुफिया एजेंसी मिलिट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी भेज रहा है।
चीन की कोशिश यह है कि वह पाकिस्तान और नेपाल दोनों को भारत के खिलाफ साध ले। पाकिस्तान ने ऐसा कर भारतीय सीमा पर 20 हजार सैनिकों की तैनाती भी कर दी है। चीन की नेपाल में राजदूत हायो यांकी ने वहां अपनी उपस्थिति केवल भारत विरोध कार्यों के लिए दर्ज कराई है, ऐसा खुफिया एजेंसियों को पता चला है। बताया जाता है कि नेपाल के नक्शे में बदलाव कर उसमें भारतीय गांवों को शामिल कराने के पीछे भी चीनी राजदूत के उकसावे का हाथ है। उधर पाकिस्तान प्रधानमंत्री ओली और नेपाल के अहम नेताओं से संपर्क साधने में लगा हुआ है।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान नेपाल स्थित अपने दूतावास में आईएसआई के कर्मचारियों की संख्या को भी बढ़ा रहा है। चीन और पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कूटनीतिक रूप से नेपाल को चुना है, वह भी तब वहां पहले ही कम्युनिस्ट पार्टी सरकार भारत विरोधी माहौल बना रही, जिसके पीछे भी चीन का ही हाथ बताया जाता है। इस बीच तेजी से बदलते घटनाक्रम के तहत नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी अगर अस्थिर हो रही है तो उसमें उसे भारत का हाथ लगता है, जबकि नेपाल की विपक्षी पार्टियां ही प्रधानमंत्री को हटाने की मांग कर रही हैं।
इससे साफ है कि भारत के खिलाफ नेपाल की वर्तमान सरकार कुछ भी कदम उठाए, मगर उसके खुद के देश में ही भारत विरोध पर सरकार के खिलाफ आवाज तेज हो गई है। यह हमारी कूटनीतिक सफलता ही कही जाएगी। इतना अवश्य है कि चीन, पाकिस्तान अगर भारत के खिलाफ नेपाल को हथियार बनाना चाह रहे हैं तो भारत ऐसा होने नहीं देगा।
