चीन को संदेश

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Edited By Amrit Vichar
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चीन से लद्दाख में सीमा पर तनाव के बीच शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक जब लेह पहुंचे तो भारत-चीन रिश्तों और चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ उन्होंने साफ संदेश दे दिया। एक तरफ चीन बातचीत के बीच अपने सैन्य इलाकों में सैन्य शक्ति बढ़ाते हुए लगभग युद्धोन्माद की स्थिति पैदा कर रहा है …

चीन से लद्दाख में सीमा पर तनाव के बीच शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक जब लेह पहुंचे तो भारत-चीन रिश्तों और चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ उन्होंने साफ संदेश दे दिया। एक तरफ चीन बातचीत के बीच अपने सैन्य इलाकों में सैन्य शक्ति बढ़ाते हुए लगभग युद्धोन्माद की स्थिति पैदा कर रहा है तो ऐसे में देश और दुनिया में हमारी सेना और सरकार को लेकर साफ संदेश दिया जाना जरूरी था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए किसी और पटल का सहारा नहीं लिया बल्कि वह खुद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ लेह में 11 हजार फीट की ऊंचाई पर सैनिकों से मिलने पहुंच गए।

प्रधानमंत्री के लेह पहुंचने के बाद कुछ संदेश साफ हैं। पहला तो सीधे चीन के लिए है। वह समझ ले कि भारत किसी भी सूरत में चीन के साथ समझौता नहीं करेगा बल्कि वह किसी भी स्थिति से निपटने और जवाब देने को तैयार है। दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि विषम हिमालयी परिस्थितियों में हमारे सैनिक चीनी सैनिकों का मुकाबला कर रहे हैं। उनके मनोबल में कोई कमी नहीं है, मगर प्रधानमंत्री के उन सैनिकों के बीच पहुंचने से उनका मनोबल और बढ़ेगा यह तय है। इसीलिए जब प्रधानमंत्री सैनिकों के बीच पहुंचे तो सैनिकों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम जैसे नारे भी लगाए।

प्रधानमंत्री के लेह दौरे के बाद पाकिस्तान को साफ तौर पर समझ में आएगा कि हमारे देश और हमारी सेनाएं हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं। एक लिहाज से यह दौरा पाकिस्तान के लिए भी सबक है। प्रधानमंत्री ने चीन को साफ संदेश दिया कि पूरी दुनिया में इस वक्त विस्तारवाद कि मुखालफत हो रही है। इस वक्त बात विस्तारवाद की जगह विकासवाद की हो रही है। लिहाजा चीन को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि वह विस्तारवाद की तरफ जरा भी न सोचे।

गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने जिस तरह धोखे से भारत पर हमला किया उसका संख्या बल में काफी कम होने के बावजूद भारत सैनिकों ने उचित तरीके से जवाब दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तमाम स्तर की वार्ता के बावजूद चीन ने अपनी तरफ सैन्य जमावड़ा लगातार बढ़ाना शुरू किया।

शायद यह चीन की चाल रही होगी कि वह सैन्य जमावड़ा बढ़ाकर भारत को दबाव में लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपनी मनमानी करे। भारत ने इसका जवाब देते हुए अपने सैन्य बल तो बढ़ाए ही, अब प्रधानमंत्री ने सीधे मोर्चे पर जाकर चीन को यह संदेश दे दिया है कि वह किसी मुगालते में न रहे। यह संदेश सही वक्त पर दिया गया है, जिसके कूटनीतिक तौर पर भी बहुत मायने हैं।