अयोध्या: जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी चिकित्सकों का भारी टोटा, व्यवस्था चरमराई

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अमृत विचार, अयोध्या। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। 11 ब्लॉक की 34 पीएचसी व 13 सीएचसी में चिकित्सकों का भारी टोटा है। सर्जन, फिजिशियन, विशेषज्ञ, कॉर्डियोलॉजिस्ट व रेडियोलॉजिस्ट का अकाल पड़ा हुआ है। लगभग 20 लाख से भी अधिक की आबादी को कवर …

अमृत विचार, अयोध्या। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। 11 ब्लॉक की 34 पीएचसी व 13 सीएचसी में चिकित्सकों का भारी टोटा है। सर्जन, फिजिशियन, विशेषज्ञ, कॉर्डियोलॉजिस्ट व रेडियोलॉजिस्ट का अकाल पड़ा हुआ है। लगभग 20 लाख से भी अधिक की आबादी को कवर करने वाले 13 सीएचसी में महज एक ही सर्जन हैं। पूराबाजार में उनकी तैनाती है। बाकी जगहों पर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों को कितनी दुश्वारियां झेलनी पड़ती होंगी।

पूरे जिले में 5 बाल रोग विशेषज्ञ ही हैं, जो पूराबाजार, मसौधा, बीकापुर, सोहावल व रुदौली में तैनात हैं। बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण अपने बच्चों के इलाज के लिए लोग प्राइवेट हॉस्पिटल व बाहर जाने को मजबूर हैं। जनरल फिजिशियन की भी भारी कमी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ व एनेस्थेटिस्ट की भी कमी है। मेडिकल सर्जन चिकित्सकों की संख्या दो बताई जा रही है, लेकिन दूसरे सर्जन ऑर्थोपैडिक है। उनकी सोहावल में तैनाती है।

सीएचसी और पीएचसी में लगभग 135 से अधिक चिकित्सकों की तैनाती की गई है, लेकिन मरीजों का सिर्फ काम चलाऊ उपचार ही हो पाता है, जबकि गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को या तो जिला मुख्यालय आना पड़ता है या तो लखनऊ भागना पड़ता है। मवई सीएचसी में सर्पदंश से बच्चे की मौत का मामला भी चिकित्सकों की कमी से ही जुड़ा था। गत दिनों यहां परिजन बच्चे को सीएचसी लेकर पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही कारण बच्चे ने पिता के कंधे पर दम तोड़ दिया था।

1272 गांव, बच्चों के डॉक्टर सिर्फ 5
शहर से अधिक आबादी गांवों में रहती है। ऐसे में गांवों के स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान मुख्य चिकित्सा अधिकारी के हाथों में होती है। जिले में 1272 गांवों के लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सीएचसी और पीएचसी हैं। 47 अस्पतालों में कुल 5 बाल रोग विशेषज्ञों पर बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी है।

बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर ही होता है। वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो जनपद के लगभग सभी अस्पतालों में संक्रामक रोगों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में चिकित्सकों की कमी होने चलते मरीजों का इलाज करना स्वास्थ्य महकमे के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

डॉक्टरों व कर्मचारियों की कमी होने के बाद भी सीमित संसाधनों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए शासन से पत्राचार जारी है। आशा है कि जल्द ही डॉक्टरों की कमी पूरी हो जाएगी— डॉ. अजय राजा, सीएमओ, अयोध्या

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