शिक्षा ऋण में NPA अधिक होने से बैंक मंजूरी देने में बरत रहे सावधानी

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नई दिल्ली। शिक्षा ऋण पोर्टफोलियो में चूक की करीब आठ प्रतिशत की ऊंची दर को देखते हुए बैंक अब सतर्क हो गए हैं और इस तरह के कर्ज की मंजूरी में विशेष सावधानी बरत रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों समेत अन्य बैंकों की शिक्षा ऋण श्रेणी में गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) चालू वित्त वर्ष …

नई दिल्ली। शिक्षा ऋण पोर्टफोलियो में चूक की करीब आठ प्रतिशत की ऊंची दर को देखते हुए बैंक अब सतर्क हो गए हैं और इस तरह के कर्ज की मंजूरी में विशेष सावधानी बरत रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों समेत अन्य बैंकों की शिक्षा ऋण श्रेणी में गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही के अंत में 7.82 फीसदी थीं।

जून महीने के अंत तक बकाया शिक्षा ऋण करीब 80,000 करोड़ रुपये था। सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च एनपीए की वजह से शिक्षा कर्ज की मंजूरी देने में शाखाओं के स्तर पर सतर्कता भरा रवैया अपनाया जा रहा है। इसकी वजह से वास्तविक मामले नजरंदाज हो जाते हैं और इनमें विलंब भी होता है। वित्त मंत्रालय ने शिक्षा ऋण पोर्टफोलियो का जायजा लेने के लिए हाल में सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की बैठक बुलाई थी।

आरबीआई के एक पत्र में कहा गया कि भारत में वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए गए शिक्षा कर्ज के एनपीए में हाल के वर्षों में तेज वृद्धि हुई है जो चिंता का विषय है और देश में उच्च शिक्षा के लिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज में वृद्धि प्रभावित हो सकती है। जून 2022 में प्रकाशित इस पत्र में कहा गया कि भारत में करीब 90 फीसदी शिक्षा ऋण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देते हैं। मार्च 2020 तक शिक्षा ऋण के कुल बकाया में निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी करीब सात फीसदी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की तीन फीसदी है।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 तक सभी बैंकों का शिक्षा ऋण बकाया मिलाकर कुल 78,823 करोड़ रुपये था जो 25 मार्च 2022 तक बढ़कर 82,723 करोड़ रुपये हो गया। रिसर्जेंट इंडिया में प्रबंध निदेशक ज्योति प्रकाश गादिया ने बताया कि कॉलेजों से निकलने वाले स्नातकों की संख्या नए रोजगार सृजन की तुलना में कहीं अधिक है जिसकी वजह से शिक्षा ऋणों का समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है।

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