टनकपुर: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन 40 हजार श्रद्धालुओं ने किए मां पूर्णागिरी के दर्शन, अव्यवस्था रही हावी
टनकपुर, अमृत विचार। देश के सुविख्यात मां पूर्णागिरि धाम में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने पहुंचकर अपने शीश नवाए। भारी अव्यवस्था होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा। नवरात्रि पर्व को देखते हुए रविवार से ही भारी संख्या में श्रद्धालु टनकपुर में पहुंचना शुरू हो गए थे। …
टनकपुर, अमृत विचार। देश के सुविख्यात मां पूर्णागिरि धाम में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने पहुंचकर अपने शीश नवाए। भारी अव्यवस्था होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा।
नवरात्रि पर्व को देखते हुए रविवार से ही भारी संख्या में श्रद्धालु टनकपुर में पहुंचना शुरू हो गए थे। रविवार को हुई भारी वर्षा के कारण पूर्णागिरि मार्ग ठीक ना होने से बाहर से आए श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी। किरोड़ा नाला में अधिक पानी होने और बाटनागाड़ में मलवा आ जाने से पूर्णागिरि मार्ग बंद हो गया था। इस दौरान रात्रि में उप जिलाधिकारी हिमांशु कफलटिया व तहसीलदार पिंकी आर्या फोर्स के साथ पूर्णागिरि मार्ग पहुंचे, जहां उन्होंने मार्ग को दुरुस्त कराया। रात्रि करीब 9 बजे मार्ग खुल पाया। रात्रि में ही बांटनागाड़ में मलवा हटाने के लिए एकमात्र जेसीबी लगाई गई। इसके कारण काफी दिक्कतें आई। यदि क्षेत्र में दो जेसीबी मशीन होती तो मार्ग पहले भी खुल सकता था। रात्रि के समय बड़े वाहनों को टनकपुर ही रोक दिया गया जबकि छोटे वाहनों को उचौलीगोठ पार्किंग स्थल में रोका गया। इसके बाद अन्य वाहनों से श्रद्धालुओं को भैरव मंदिर तक पहुंचाया गया। इस दौरान जिन छोटे वाहनों को उचौलीगोठ पार्किंग स्थल पर रोका गया, उनसे पार्किंग ठेकेदार द्वारा 150 रुपया वसूला गया है। जबकि यह शुल्क वाहनों के भैरव मंदिर तक पहुंचने में लिया जाता है। इस मनमानी से श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी।
वहीं, पूर्णागिरि क्षेत्र में पानी का संकट गहराने से श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतें उठानी पड़ी। जगह-जगह पेयजल पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसे जल संस्थान द्वारा अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि भारी वर्षा होने के कारण पाइपलाइन जगह जगह क्षतिग्रस्त हो गई है, उन्हें सुधारा जा रहा है। मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन के बाद श्रद्धालु नेपाल के महेंद्रनगर और ब्रह्मदेव मंडी स्थित सिद्धनाथ मंदिर में भी दर्शन के लिए पहुंचे।
