परीक्षण से उम्मीदें
एक तरफ देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगातार बढ़ रही है तो, मंगलवार से देश में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। कोरोना वायरस को लेकर इस बीच चिंतित करने और उत्साहजनक दोनों तरह की खबरें आ रही हैं। कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ डेथ रेट कम …
एक तरफ देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगातार बढ़ रही है तो, मंगलवार से देश में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। कोरोना वायरस को लेकर इस बीच चिंतित करने और उत्साहजनक दोनों तरह की खबरें आ रही हैं।
कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ डेथ रेट कम हो रहा है, मगर चिंता की बात यह है कि पांच दिन में एक लाख नए मरीज सामने आ रहे हैं। 30 जनवरी को देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। 158 दिन में 1 से बढ़कर मरीज 7 लाख पार हो गए। इस रफ्तार से इस महीने यह आंकड़ा 12 लाख के पार जा सकता है। अभी देश में रिकवरी रेट 60 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है, जबकि डेथ रेट 2.82 प्रतिशत है।
कोरोना वैक्सीन को लेकर कोरोना वायरस की पहचान के बाद से ही विश्वभर में वैक्सीन और दवा बनाने को लेकर वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं। भारत में इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने भारत बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर कोरोना की वैक्सीन बनाई है। एम्स में मंगलवार से इसका ट्रायल शुरू हो गया है।
हालांकि वैक्सीन ट्रायल की बात के बाद इस मुद्दे में लगातार विवाद भी बना हुआ है। किसी भी वैक्सीन के मानवीय परीक्षण के बाद उसे क्लीनिकली सही सिद्ध करने में काफी वक्त लगता है। मगर आईसीएमआर ने जब 15 अगस्त तक वैक्सीन लॉन्च होने की संभावना जताई तो तमाम चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसके विरोध में बोलना शुरू कर दिया था। दूसरा, एम्स की रिसर्च विंग ने सरकार को भेजे सुझावों में कहा था कि प्रोटोकॉल के 11 बिंदुओं में सुधार किया जाना चाहिए। विंग ने रिसर्च के लिए सैंपल की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया था। अब मंगलवार से वैक्सीन ट्रायल की प्रक्रिया के तहत नामांकन शुरू हो गया है।
हालांकि यह बात भी सामने आई थी कि आईसीएमआर ने वैक्सीन ट्रायल को लेकर जो मापदंड निर्धारित किए हैं, वह उस पर खरा ही उतरेगा क्योंकि वैक्सीन के मानव ट्रायल जैसे गंभीर मामले में कहीं से भी जल्दबाजी की कोई गुंजाइश नहीं है। ट्रायल की प्रक्रिया में कुछ देर भले ही हो जाए, मगर यह सारे मापदंडों पर खरा उतरना चाहिए।
कोरोना वायरस की पहचान के बाद अगस्त नहीं दिसंबर तक भी वैक्सीन मानव प्रयोग के लिए आ जाती है तो इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाएगा, क्योंकि किसी भी वैक्सीन के विकास के लिए एक साल का वक्त भी बहुत कम ही माना जाता है। इसमें भी अगर अगस्त तक वैक्सीन ट्रायल पूरा होकर सफल होता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में भारत का नाम ऊंचा ही करेगा। मगर इस स्तर पर किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचकर सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने की कोशिश होनी चाहिए।
