बागेश्वर: गांवों में कन्या पूजन को नहीं मिली कन्याएं

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बागेश्वर, अमृत विचार। धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन पर नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। जबकि इनके साथ एक बालक का भी पूजन भगवान गणेश या भैरव देवता के रूप में किया जाता हैं जबकि नौ कन्याओं का पूजन नौ देवियों के रूप में किया जाता है। लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में कन्याओं …

बागेश्वर, अमृत विचार। धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन पर नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। जबकि इनके साथ एक बालक का भी पूजन भगवान गणेश या भैरव देवता के रूप में किया जाता हैं जबकि नौ कन्याओं का पूजन नौ देवियों के रूप में किया जाता है। लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में कन्याओं का मिलना मुश्किल होने लगा है जिसका प्रमुख कारण पलायन माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा व स्वास्थ्य के चलते तथा गांवों में रोजगार के साधन न होने के कारण विगत कुछ सालों में पलायन की रफतार बढ़ी है। जिस कारण कई परिवारों ने बच्चों को लेकर अपने परिवार गांव से शहरी इलाकों में रखना प्रारंभ कर दिया है। जिस कारण गांव में बडे बुजुर्ग ही रह गए हैं।

नवरात्र के अवसर पर बड़े बुजुर्ग आस्था के साथ नवरात्र करते हैं तथा रामनवमी के दिन कन्या पूजन कर नवरात्र व्रत तोड़ते हैं। परंतु अब गांवों में कन्या पूजन को कन्याएं मिलना मुश्किल हो गया है। जिस कारण बड़े बुजुर्गों को कन्या पूजन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों के परिवारों ने घर में पंडित के माध्यम से पूजन कराया तथा कन्याओं को इस अवसर पर प्रदान की जाने वाली पूजन सामग्री, भोजन व भेंट लेकर बाजार में कन्याओं को दी।

जबकि कई भक्तों ने कन्याओं को दी जाने वाली भेंट व भोजन प्रसाद आदि को पंडित को ही देकर मन शांत किया। बुजुर्ग कलावती देवी, नीतू लोहनी, अल्का लोहनी ने बताया कि पलायन के चलते आर्थिक असंतुलन के साथ ही अब धार्मिक आस्था कार्यक्रम आयोजन करने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने सरकार व जनप्रतिनिधियों से पलायन रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाने की मांग की है।

संबंधित समाचार