मुरादाबाद : हर पल अपनों की राह देखती हैं बूढ़ी आंखें
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिन बच्चों को मां अपने आंचल में छिपाकर मातृत्व सुख का अनुभव कर फूली नहीं समाती थी, जिसे कंधे पर बैठाकर पिता इतराया करते थे, वह बड़े हुए तो उन्हें अपने जन्मदाता ही बोझ लगने लगे। रिश्तों को बोझिल मानकर बच्चों ने परिवार के बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में पहुंचा दिया। बुजुर्गों का कहना …
मुरादाबाद,अमृत विचार। जिन बच्चों को मां अपने आंचल में छिपाकर मातृत्व सुख का अनुभव कर फूली नहीं समाती थी, जिसे कंधे पर बैठाकर पिता इतराया करते थे, वह बड़े हुए तो उन्हें अपने जन्मदाता ही बोझ लगने लगे। रिश्तों को बोझिल मानकर बच्चों ने परिवार के बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में पहुंचा दिया। बुजुर्गों का कहना है कि यहां सब सुख है, लेकिन अपनों की याद हर पल सताती है। त्योहारों पर खुशियों के दिनों की याद आती है तो उनके नेत्र सजल हो जाते हैं। मिलन विहार स्थित वृद्धाश्रम में अमृत विचार की टीम ने इन बुजुर्गों के साथ कुल पल साझा किया तो सभी भावुक हो गए।
न जाने कैसा दिखता होगा बेटा
75 वर्षीय किरन (काल्पनिक नाम) 2016 से आश्रम में अपने जीवन के दिन गुजार रही हैं। जब उनसे परिवार के बारे में बात की गई तो वह अपने बेटे की याद में भावुक हो गईं। बोलीं, न जाने इस समय कैसा दिखता होगा मेरा बेटा। अरसे से उसे देखा नहीं, अब तो आंखें धुंधला गई हैं। आश्रम में छह साल रहने के दौरान न बेटा मिलने आया और न फोन कर हाल जाना। शायद वह भूल गया होगा। मैं तो मां हूं अपने कलेजे के टुकड़े की याद हरदम सताती है।
मिलकर मनाते थे त्योहार
लीलावती (काल्पनिक नाम) कहती हैं कि उन्हें शृंगार करना बहुत पसंद था। वह करवा चौथ पर खूब सजती संवरती थीं। दिवाली पूरा परिवार साथ मिलकर मनाता था, लेकिन 2015 में पति की मौत के बाद सब बिखर गया। घर में कलह शुरू हुई और बेटों को अपनी मां का लालन-पालन बोझ लगने लगा। इससे निराश होकर वह 2017 से वृद्धाश्रम में ही गुजर बसर कर रही हैं।
उसे अपनी गलती का जरूर होगा एहसास
सपना (काल्पनिक नाम) कहती हैं कि अपनों की बेरुखी ने इतना दर्द दिया है कि अब जीवन मजबूरी में काट रही हैं। वह कहती हैं कि छह सालों से सुख-दुख में आश्रम के लोग ही सहारा बने हैं। बेटों की याद आती है लेकिन, कहां रहते है अब यह मालूम नहीं है। बच्चों को कभी न कभी अपनी गलती का एहसास जरूर होगा।
अपनों से तिरस्कृत 400 बुजुर्गों को आश्रम में मिला सहारा
दीपजन कल्याण समिति के नाम से संचालित वृद्धाश्रम के प्रबंधक नीरज वर्मा ने बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से आश्रम के लिए बजट मिलता है। बताया कि वर्ष 2015 से अब तक 400 वृद्धों को पनाह दे चुके हैं। 50 से ज्यादा वृद्धों का परिवार बनकर संस्कार भी संजोएं हैं। यहां 114 बुजुर्ग अभी रह रहे हैं।
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