हल्द्वानी: तराई के जंगलों से नहीं काटी जाएगी गजराज की पसंदीदा ‘रोहिणी’
हल्द्वानी, अमृत विचार। जंगलात ने मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए तराई से भाबर के जंगलों में गजराज के पंसदीदा भोजन रोहिणी के पातन पर रोक लगा दी है। पश्चिमी वन वृत्त के अंतर्गत तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, रामनगर और हल्द्वानी वन डिवीजन में रेंज वार सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि में मिश्रित …
हल्द्वानी, अमृत विचार। जंगलात ने मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए तराई से भाबर के जंगलों में गजराज के पंसदीदा भोजन रोहिणी के पातन पर रोक लगा दी है।
पश्चिमी वन वृत्त के अंतर्गत तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, रामनगर और हल्द्वानी वन डिवीजन में रेंज वार सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि में मिश्रित पौधरोपण किया जाता है। इस पौधरोपण में पर्यावरण संरक्षण, विलुप्ति होने वाली प्रजातियां, स्थानीय प्रजातियां और वन्यजीवों के आहार की प्रजातियां शामिल होती हैं। वृक्षों की आयु पूरी होने पर नियमानुसार इनका पातन किया जाता है। इधर, तराई में हाथियों की आबादी के घुसने से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
आए दिन हाथियों की गांव में घुसकर फसल नष्ट करने, घरों को तोड़ने और कभी कभी इंसानों पर हमले की सूचनाएं मिलती हैं। इस संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग तत्पर है। वन विभाग ने तराई-भाबर के जंगलों में मिश्रित पौधरोपण में हाथी का पसंदीदा भोजन रोहिणी के पातन पर रोक लगा दी है। पश्चिमी वन वृत्त के अंतर्गत किसी भी वन डिवीजन की किसी भी रेंज में रोहिणी के एक भी वृक्ष का पातन नहीं किया जाएगा। इसके उल्ट इसको रोपा जाएगा। वन अधिकारियों का मानना है कि यदि हाथी को भोजन जंगल में ही मिल जाता है तो वे आबादी की ओर रूख नहीं करेंगे। जिससे काफी हद तक मानव वन्यजीव संषर्घ की घटनाओं की रोकथाम होगी।
उत्तराखंड में हाथी के हमले से हुई 10 मौतें
उत्तराखंड में गजराज जल्दी आग बबूला नहीं होते हैं। जंगलों में भोजन मिल जाने और इंसानी दखल कम होने से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं कम हैं। इस साल हाथियों के हमले में 10 मौतें हुई हैं।
20 साल में दो हजार के पार हुई गजराज की संख्या
उत्तराखंड के जंगल गजराज के लिए मुफीद माने जाते हैं। राज्य गठन के बाद 2001 में हुई गणना में जंगलों में 1507 हाथी मिले थे। इनकी संख्या हर साल वृद्धि हुई। 20 सालों में इनकी संख्या बढ़कर दो हजार के पार पहुंच गई है। वर्ष 2020 की गणना के अनुसार राज्य में 2026 हाथी हैं, इनमें राजाजी टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या अधिक है।
मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग प्रयासरत है। टेंटिकल फेंसिग, खाई खुदान, हाथी दीवार के अलावा हाथियों को जंगलों में रोकने के लिए उनका पंसदीदा भोजन मुहैया कराया जा रहा है इसलिए पीसीसीएफ ने तराई के जंगलों में रोहिणी के पातन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
दीप चंद्र आर्य, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त हल्द्वानी
