मिलकर लड़ें
दुनिया में कोविड-19 के मामले 1.27 करोड़ के करीब पहुंच गए हैं, जबकि इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 5.64 लाख से अधिक हो गई है। मामलों की दृष्टि से भारत तीसरे स्थान पर है। देश में कोरोना के मामले 8.5 लाख के पार हो चुके हैं और 22 हजार से ज्यादा मरीज मर …
दुनिया में कोविड-19 के मामले 1.27 करोड़ के करीब पहुंच गए हैं, जबकि इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 5.64 लाख से अधिक हो गई है। मामलों की दृष्टि से भारत तीसरे स्थान पर है। देश में कोरोना के मामले 8.5 लाख के पार हो चुके हैं और 22 हजार से ज्यादा मरीज मर चुके हैं। लगातार घंटों के हिसाब से मामले बढ़ रहे हैं। आशंका है कि कोरोना मरीजों के मामलों में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए भारत दुनिया में नम्बर एक न बन जाए।
महाराष्ट्र कोरोना का सबसे अधिक कहर झेल रहा है। अभिनेता अमिताभ बच्चन व अभिषेक बच्चन के बाद रविवार को अनुपम खेर की मां, भाई कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राजभवन के 15 से अधिक कर्मचारियों का कोरोना वायरस परीक्षण पॉजिटिव आने के बाद खुद को आइसोलेट कर लिया है।
10 हजार से अधिक मामलों वाले राज्यों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम और बिहार शामिल हैं। देश में कोरोना संक्रमितों की पहचान करने, उनका समय पर इलाज करने और कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जो कदम उठाए गए वे नाकाफी साबित हो रहे हैं।
देशव्यापी लाकडाउन के बाद डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई कोशिशें की गईं। ठेके खोल दिये गए, बाजार खुल गए पर संक्रमण का प्रसार बढ़ता रहा। एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है, इस वजह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। तय है कि कोरोना इतनी जल्दी हमारा पीछा नहीं छोड़ने वाला।
शायद इसीलिए उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोगों से कोरोना वायरस के चलते बंदिश के दौरान पिछले कुछ महीनों के जीवन पर आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह किया है और मूल्यांकन भी कि क्या उन्होंने सही सबक सीखा और ऐसी अनिश्चितताओं से निपटने के लिए खुद को तैयार किया है। ताकि भविष्य में ऐसी कठिनाइयों की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिल सके।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कोरोना के साथ जीना है, लोग तो पहले से ही तैयार थे। तभी तो लॉकडाउन में भी जब मौका मिला सड़कों पर भीड़ हुई। लेकिन फिलहाल लोगों को लापरवाही से डरना चाहिए। सबको सुरक्षित भविष्य के लिए सही सबक लेने की जरुरत है। समझना होगा कि महामारी से बचाव के लिए कोई भी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। अपनी सुरक्षा को कम न होने दें। सतर्क रहें, सजग रहें और बुरे समय से मिलकर लड़ें।
