रायबरेली: नौ साल बाद पहली बार रेल पहिया कारखाने में बने 50 एलएचबी व्हील्स

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रायबरेली। रविवार को रायबरेली के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। स्थापना के नौ साल बाद लालगंज के रेल पहिया कारखाने में बन कर तैयार पचास एलएचबी व्हील्स की पहली खेप रविवार को केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के सचिव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। अभी तक यहां बनने वाले रेल कोच में बाहर से पहिया …

रायबरेली। रविवार को रायबरेली के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। स्थापना के नौ साल बाद लालगंज के रेल पहिया कारखाने में बन कर तैयार पचास एलएचबी व्हील्स की पहली खेप रविवार को केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के सचिव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। अभी तक यहां बनने वाले रेल कोच में बाहर से पहिया आते थे । अब पहियों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर ही शुरू हो गया है।

इसके पूर्व केंद्रीय सचिव संजय कुमार सिंह ने अतिरिक्त सचिव रुचिका चौधरी गोविंल, आरआईएनएल के सीएमडी अतुल भट्ट, निदेशक ऑपरेशन एके सक्सेना के साथ रेल पहिया कारखाने का निरीक्षण किया। टीम ने फोर्जिंग एरिया, हीट ट्रीटमेंट एरिया, मशीनिंग एरिया, एनडीटी एरिया, इलेक्ट्रिक हाउस, लेबोरेटरी, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, एमआर एसएस प्लांटों का निरीक्षण कर अधिकारियों से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि आरआईएनएल और रेल पहिया कारखाने के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया सपने को आजादी के अमृत महोत्सव के स्वर्णिम अवसर पर साकार कर दिया।

यह आत्मनिर्भर भारत में इंजीनियरिंग की दुनिया में बढ़ते हुए कदम हैं। उन्होंने रेल पहिये को बनाने में गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिये। रेल पहिया कारखाने के मुख्य महाप्रबंधक एवं प्रोजेक्ट इंचार्ज डॉ. बीआर बप्पा राव ने अधिकारियों का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक एफडब्ल्यूपी के श्रीनिवास, रेल कोच के पीसीएमएम एन डी राव, आरडीएसओ डा. अनिरुद्ध गौतम, बीएल बैरवा सहित आरआईएनएल के जीएम डिजाइन एंड इंजीनियरिंग सदानंद सरकार, जीएम प्रोजेक्ट समीर हलधर, असिस्टेंट मैनेजर राहुल सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आधुनिक पहियों से घटेगी दुर्घटना की संभावना
रेल पहिया कारखाने का शिलान्यास सांसद सोनिया गांधी ने आठ अक्टूबर 2013 को किया था इसके निर्माण का जिम्मा केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के अधीन काम करने वाली आरआईएनएल को सौंपा गया था। नौ वर्षो के कठिन प्रयास व मेहनत के दम पर अब एलएचबी पहिए बनकर तैयार हुए हैं।

लम्बे समय के कसमकस के बाद कोरोना ने भी कुछ समय के लिये पहियों की रफ्तार रोक दिया था। वही विदेशी तकनीक व विशेषज्ञों पर निर्भरता के चलते रेल पहियों का निर्माण देर से शुरू हुआ है। रेल पहिया कारखाने के निर्माण में 1683 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, तब जाकर रेल कोच को पहिया मिलने की शुरुआत हुई है। एलएचबी व्हील्स आधुनिक किस्म के पहिए हैं जिनके लगने से रेलगाड़ियों में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की शंका नहीं रहती है।

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